त्योहारों से पहले दाल सस्ती करने के लिए सरकार ने उठाया बड़ा कदम, सीधा होगा आम आदमी पर असर



 केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए अरहर (तुअर) और उड़द दाल के खुले इम्पोर्ट (Free Import of Tur-Urad) की अवधी 31 दिसंबर 2021 तक के लिए बढ़ा दी है. वाणिज्य मंत्रालय की नोटिफिकेशन के मुताबिक, 31 दिसंबर, 2021 को या उससे पहले जारी किए गए लदान बिल के साथ इन वस्तुओं की आयात खेप को 31 जनवरी, 2022 के बाद सीमा शुल्क विभाग परमिशन नहीं देगा. मंत्रालय ने नोटिस में कहा कि 2021-22 की अवधि के लिए प्रतिबंधित दाल आयात मंजूरी के लिए एप्लीकेशन देने वालों ने जो एप्लीकेशन फीस जमा कराया था उसकी वापसी के लिए प्रक्रिया तय की गई है.

2/6दलहन और तिलहन का बड़ा उत्पादक देश होने के बावजूद भारत को विदेशों से दाल आयात करना पड़ता है. यहां दाल उत्पादन की बात करें तो वर्ष 2019-20 में तूर की दाल 38.90 मीट्रिक टन, उड़द की दाल 20.80 मीट्रिक टन, मसूर की दाल 11 मीट्रिक टन, मूंग की दाल 25.10 मीट्रिक टन और चना की दाल 118 मीट्रिक टन रहा था. इसी वर्ष तूर, उड़द, मसूर, मूंग और चना की दाल क्रमश: 4.50 मीट्रिक टन, 3.12 मीट्रिक टन, 8.54 मीट्रिक टन, 0.69 मीट्रिक टन और 3.71 मीट्रिक टन दूसरे देशों से आयात करनी पड़ी थी.

दलहन और तिलहन का बड़ा उत्पादक देश होने के बावजूद भारत को विदेशों से दाल आयात करना पड़ता है. यहां दाल उत्पादन की बात करें तो वर्ष 2019-20 में तूर की दाल 38.90 मीट्रिक टन, उड़द की दाल 20.80 मीट्रिक टन, मसूर की दाल 11 मीट्रिक टन, मूंग की दाल 25.10 मीट्रिक टन और चना की दाल 118 मीट्रिक टन रहा था. इसी वर्ष तूर, उड़द, मसूर, मूंग और चना की दाल क्रमश: 4.50 मीट्रिक टन, 3.12 मीट्रिक टन, 8.54 मीट्रिक टन, 0.69 मीट्रिक टन और 3.71 मीट्रिक टन दूसरे देशों से आयात करनी पड़ी थी.

3/6वहीं, पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 की बात करें तो वर्ष 2019-20 में देश में तूर की दाल 38.80 मीट्रिक टन, उड़द की दाल 24.50 मीट्रिक टन, मसूर की दाल 13.50 मीट्रिक टन, मूंग की दाल 26.20 मीट्रिक टन और चना की दाल 116.20 उत्पादित की गई​ थी. जबकि तूर, उड़द, मसूर, मूंग और चना की दाल क्रमश: 4.40 मीट्रिक टन, 3.21 मीट्रिक टन, 11.01 मीट्रिक टन, 0.52 मीट्रिक टन और 2.91 मीट्रिक टन की मात्रा में आयात करना पड़ा था.

वहीं, पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 की बात करें तो वर्ष 2019-20 में देश में तूर की दाल 38.80 मीट्रिक टन, उड़द की दाल 24.50 मीट्रिक टन, मसूर की दाल 13.50 मीट्रिक टन, मूंग की दाल 26.20 मीट्रिक टन और चना की दाल 116.20 उत्पादित की गई​ थी. जबकि तूर, उड़द, मसूर, मूंग और चना की दाल क्रमश: 4.40 मीट्रिक टन, 3.21 मीट्रिक टन, 11.01 मीट्रिक टन, 0.52 मीट्रिक टन और 2.91 मीट्रिक टन की मात्रा में आयात करना पड़ा था.

4/6बड़ा उत्पादक होने के बावजूद कम पड़ जाती हैं दाल-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 5 वर्ष पहले जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोजांबिक से दलहनों के दीर्घावधिक आयात संबंधित एमओयू को मंजूरी दी थी, तभी कहा गया था कि अगले 5 वर्षों में आयात दोगुना किया जाएगा. हालांकि भारत दुनिया में दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश को हर वर्ष लाखों टन दाल की कमी पड़ती है. कभी सूखे के कारण तो कभी अन्य कारणों से घरेलू उत्पादन में गिरावट दर्ज की जाती रही है.

बड़ा उत्पादक होने के बावजूद कम पड़ जाती हैं दाल-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 5 वर्ष पहले जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोजांबिक से दलहनों के दीर्घावधिक आयात संबंधित एमओयू को मंजूरी दी थी, तभी कहा गया था कि अगले 5 वर्षों में आयात दोगुना किया जाएगा. हालांकि भारत दुनिया में दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश को हर वर्ष लाखों टन दाल की कमी पड़ती है. कभी सूखे के कारण तो कभी अन्य कारणों से घरेलू उत्पादन में गिरावट दर्ज की जाती रही है.

5/6इसीलिए सरकार विदेशों से मंगा रही है दाल- अरहर और उड़द दाल के मुफ्त आयात  की अवधी 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ा दी गई. सरकार ने इस साल मई में इन दालों के आयात को प्रतिबंधित से मुक्त कैटेगिरी में डाल दिया था. प्रतिबंधित कैटेगिरी के तहत आने वाले उत्पादों के लिए एक इम्पोर्टर को इम्पोर्ट के लिए परमिशन या लाइसेंस लेने की जरूरत होती है.विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने मंगलवार को कहा कि भारत ने दाल की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिये इसके इम्पोर्ट को लेकर मलावी और मोजाम्बिक के साथ करार किए हैं. इसके अलावा कुछ दूसरे अफ्रीकी देशों के साथ भी दाल आयात को लेकर बातचीत चल रही है. भारत-अफ्रीका कृषि और खाद्य प्रसंस्करण शिखर सम्मेलन 2021 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अफ्रीका के लिए भारत चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है और पांचवां सबसे बड़ा निवेशक बन गया है. भारत का कुल निवेश अफ्रीका में 70.7 अरब डॉलर है.

इसीलिए सरकार विदेशों से मंगा रही है दाल- अरहर और उड़द दाल के मुफ्त आयात  की अवधी 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ा दी गई. सरकार ने इस साल मई में इन दालों के आयात को प्रतिबंधित से मुक्त कैटेगिरी में डाल दिया था. प्रतिबंधित कैटेगिरी के तहत आने वाले उत्पादों के लिए एक इम्पोर्टर को इम्पोर्ट के लिए परमिशन या लाइसेंस लेने की जरूरत होती है.विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने मंगलवार को कहा कि भारत ने दाल की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिये इसके इम्पोर्ट को लेकर मलावी और मोजाम्बिक के साथ करार किए हैं. इसके अलावा कुछ दूसरे अफ्रीकी देशों के साथ भी दाल आयात को लेकर बातचीत चल रही है. भारत-अफ्रीका कृषि और खाद्य प्रसंस्करण शिखर सम्मेलन 2021 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अफ्रीका के लिए भारत चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है और पांचवां सबसे बड़ा निवेशक बन गया है. भारत का कुल निवेश अफ्रीका में 70.7 अरब डॉलर है.

6/6सरकार का कहना है अफ्रीका के साथ भारत आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत बनाने को लेकर संभावनाएं टटोल सकता हे. वहां, दालों की खेती की जा सकती है. खाद्य सुरक्षा भारत और अफ्रीका को जोड़ती है. भारत ने मानवीय सहायता के रूप में विभिन्न अफ्रीकी देशों को 1.58 करोड़ डॉलर की खाद्य सहायता उपलब्ध कराई है. उन्होंने कहा कि अफ्रीका के पास काफी भूमि है जिसे वह विभिन्न उत्पादों के उत्पादन के लिए उपलब्ध करा सकता है.

सरकार का कहना है अफ्रीका के साथ भारत आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत बनाने को लेकर संभावनाएं टटोल सकता हे. वहां, दालों की खेती की जा सकती है. खाद्य सुरक्षा भारत और अफ्रीका को जोड़ती है. भारत ने मानवीय सहायता के रूप में विभिन्न अफ्रीकी देशों को 1.58 करोड़ डॉलर की खाद्य सहायता उपलब्ध कराई है. उन्होंने कहा कि अफ्रीका के पास काफी भूमि है जिसे वह विभिन्न उत्पादों के उत्पादन के लिए उपलब्ध करा सकता है.

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