बिहार और झारखंड के किसानों के लिए बड़े काम का है यह औषधीय पौधा, खेती से होगी लाखों में कमाई

 


भारत अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है. यहां पर कई ऐसे पौधे, फल और औषधि की खेती होती है, जो दूसरे देशों में नहीं पाए जाते. यहां पर औषधीय पौधों (Medicinal Plant) की खेती का पुराना चलन रहा है, लेकिन आज के दौर में सरकार से मिल रहे प्रोत्साहन के कारण किसान इनकी व्यावसायिक खेती करने लगे हैं. उन्हें इससे काफी अच्छी कमाई भी हो रही है. यहीं कारण है कि औषधीय पौधों की खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है.


पारंपरिक खेती से हटकर अगर किसान कुछ अलग करने की सोच रहे हैं तो औषधीय पौधा सर्पगंधा उनके लिए एक बेहतर विकल्प है. भारत में इसकी खेती उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में प्रमुखता से होती है. इसके अलावा, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र के किसान भी सर्पगंधा की खेती करते हैं.



अन्य राज्य के किसान भी छोटे स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. इससे होने वाली कमाई किसानों को आकर्षित कर रही है. डीडी किसान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सर्पगंधा की एक एकड़ में खेती करने से चार लाख रुपए तक की कमाई हो रही है. सबसे अच्छी बात है कि एक बार पौधा लगाने पर कई सालों तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.


तीन तरीकों से होती है सर्पगंधा की खेती

कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक, सर्पगंधा की तीन प्रकार से खेती की जाती है. तने से कलम बनाकर खेती करने के लिए कलमों को 30 पीपीएम वाले एन्डोल एसिटिक एसिड वाले घोल में 12 घंटें तक डुबोकर रखने के बाद बुवाई करने से पैदावार अच्छी होती है.


वहीं दूसरी विधि में इसकी जड़ों से बुवाई की जाती है. जड़ों को मिट्टी और रेत मिलाकर पॉलीथीन की थैलियों में इस प्रकार रखा जाता है कि पूरी कटिंग मिट्टी से दब जाए तथा यह मिट्टी से मात्र 1 सेंटी मीटर ऊपर रहे. जड़े एक माह के अंदर अंकुरित हो जाती हैं. इस विधि से बुवाई करने के लिए एक एकड़ में लगभग 40 किलोग्राम रूट कटिंग की आवश्यकता होती है.


अंतिम और तीसरा तरीका है बीजों से बुवाई का. इसे ही सबसे बेहतर माना जाता है. लेकिन इसके लिए अच्छे गुणवत्ता वाले बीजों का चयन बहुत जरूरी है. पुराने बीज ज्यादा उग नहीं पाते, इसलिए नए बीज से बुवाई की सलाह दी जाती है. नर्सरी में जब पौधे में 4 से 6 पत्ते आ जाएं तो उन्हें पहले से तैयार खेत में लगा दिया जाता है. सर्पगंधा के पौधों को एक बार बोने के बाद दो वर्ष तक खेत में रखा जाता है. इसलिए खेत को अच्छे से तैयार करना चाहिए. खेत में जैविक खाद मिला देने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है., Ludhiana, Jalandhar, Amritsar, Patiala, Sangrur, Gurdaspur, Pathankot, Hoshiarpur, Tarn Taran, Firozpur, Fatehgarh Sahib, Faridkot, Moga, Bathinda, Rupnagar, Kapurthala, Badnala, Ambala,Uttar Pradesh, Agra, Bareilly, Banaras, Kashi, Lucknow, Moradabad, Kanpur, Varanasi, Gorakhpur, Bihar, Muzaffarpur, East Champaran, Kanpur, Darbhanga, Samastipur, Nalanda, Patna, Muzaffarpur, Jehanabad, Patna, Nalanda, Araria, Arwal, Aurangabad, Katihar, Kishanganj, Kaimur, Khagaria, Gaya, Gopalganj, Jamui, Jehanabad, Nawada, West Champaran, Purnia, East Champaran, Buxar, Banka, Begusarai, Bhagalpur, Bhojpur, Madhubani, Madhepura, Munger, Rohtas, Lakhisarai, Vaishali, Sheohar, Sheikhpura, Samastipur, Saharsa, Saran, Sitamarhi, Siwan, Supaul,Gujarat, Ahmedabad, Vadodara, Surat, Rajkot, Vadodara, Junagadh, Anand, Jamnagar, Gir Somnath, Mehsana, Kutch, Sabarkantha, Amreli, Kheda, Rajkot, Bhavnagar, Aravalli, Dahod, Banaskantha, Gandhinagar, Bhavnagar, Jamnagar, Valsad, Bharuch , Mahisagar, Patan, Gandhinagar, Navsari, Porbandar, Narmada, Surendranagar, Chhota Udaipur, Tapi, Morbi, Botad, Dang, Rajasthan, Jaipur, Alwar, Udaipur, Kota, Jodhpur, Jaisalmer, Sikar, Jhunjhunu, Sri Ganganagar, Barmer, Hanumangarh, Ajmer, Pali, Bharatpur, Bikaner, Churu, Chittorgarh, Rajsamand, Nagaur, Bhilwara, Tonk, Dausa, Dungarpur, Jhalawar, Banswara, Pratapgarh, Sirohi, Bundi, Baran, Sawai Madhopur, Karauli, Dholpur, Jalore,Haryana, Gurugram, Faridabad, Sonipat, Hisar, Ambala, Karnal, Panipat, Rohtak, Rewari, Panchkula, Kurukshetra, Yamunanagar, Sirsa, Mahendragarh, Bhiwani, Jhajjar, Palwal, Fatehabad, Kaithal, Jind, Nuh, बिहार, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, कानपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, नालंदा, पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पटना, नालंदा, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, कैमूर, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, नवादा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बक्सर, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, शेखपुरा, समस्तीपुर, सहरसा, सारण सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, #बिहार, #मुजफ्फरपुर, #पूर्वी चंपारण, #कानपुर, #दरभंगा, #समस्तीपुर, #नालंदा, #पटना, #मुजफ्फरपुर, #जहानाबाद, #पटना, #नालंदा, #अररिया, #अरवल, #औरंगाबाद, #कटिहार, #किशनगंज, #कैमूर, #खगड़िया, #गया, #गोपालगंज, #जमुई, #जहानाबाद, #नवादा, #पश्चिम चंपारण, #पूर्णिया, #पूर्वी चंपारण, #बक्सर, #बांका, #बेगूसराय, #भागलपुर, #भोजपुर, #मधुबनी, #मधेपुरा, #मुंगेर, #रोहतास, #लखीसराय, #वैशाली, #शिवहर, #शेखपुरा, #समस्तीपुर, #सहरसा, #सारण #सीतामढ़ी, #सीवान, #सुपौल,

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