केंद्र सरकार ने गेहूं की खेती करने वाले किसानों को दिया तोहफा, पहली बार सरकारी कीमत 2000 रुपये/क्विंटल के पार पहुंची



मोदी सरकार ने कोरोना काल में परेशान हो रहे किसानों के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस बढ़ाने का फैसला लिया है. बुधवार को हुई को आर्थिक मामलो की मंत्रीमंडलीय समिति की बैठक में रबी की फसल की कीमत बढ़ाने का फैसला लिया गया. केंद्र सरकार  6 तरह के अनाजों की सरकारी खरीददारी के लिए  समर्थन मूल्य बढ़ा दिया है. गेहूं का सरकारी मूल्य पहली बार 2000 को पार कर गया. यानी इस बार कीमत 1975 न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाकर 2015 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है.  पिछले 7 साल में गेहूं की कीमत  1400 रुपये प्रति क्विंटलसे  बढकर 2015 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच चुका है. जबकि सरकारी खरीदारी में लगभग 20 मिलियन टन की बढोत्तरी हुई है.


इस साल 40 रुपये गेहूं की कीमत में इजाफा

केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य जो 2021-22 में 1975 रुपये प्रति क्विंटल रही उमें तरीबन 40 रुपये का इजाफा किया गया है यानि अगले साल जब किसान अपनी गेहूं को जब बाजार में बेचने जाएंगे. तो उन्हें अब 2015 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब मिलेगा.

सरकार ने अपने आंकड़े में बताया है कि गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2021-22 में 1975 रुपये क्विंटल है , जबकि उसकी लागत मूल्य 960 रुपये प्रति क्विंटलतय किया था इस घोषणा में लागत मूल्य को बढ़ाकर अब 1008 रुपये कर दिया गया है. एमएसपी में वास्तविक बढोत्तरी 40 रुपये प्रति क्विंटल करते हुए 2015 पहुंचा दिया है.

सरकार ने बजट भाषण के मुताबिक

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्वीट कर जानकारी दिया है कि विपणन सीजन 2022-23 के लिए रबी फसलों के लिए एमएसपी में बढोत्तरी केंद्रीय बजट 2018-19 में घोषित लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर एमएसपी तय करने के सिद्धांत के अनुरूप है. केंद्र सरकार के इस फैसले से किसानों की आय अच्छी खासी बढोत्तरी होगी और उनकी आय दूगुनी हो जाएगी.

एमएसपी में मोदी काल में कितने बढ़ोत्तरी हुई

मोदी सरकार के अब तक गेहूं की कीमत को लेकर किए गए फैसले के बारे में जानते हैं. 2014 में 1400 रुपये प्रति क्विंटल , था जिसे 2017 -18 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 1625 रुपये प्रति क्विंटल किया गया. वहीं 2018- 19110 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 1735 रुपये प्रति क्विंटल किया गया, अगले साल 2019-20 में 105 रुपये बढ़ाकर 1840 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. जबकि 2020-21 में 85 रुपये बढ़ाकर 1925 रुपये प्रति क्विंटल किया गया और 2021-22 में बढ़ाकर 1975 रुपये प्रति क्विंटल किया गया, अब इसकी कीमत 2015 की गई है. यानी मोदी काल में गेहूं की एमएसपी पर 2014 में 1400 रुपये प्रति क्विंटल से अब 2022-23 में 2015 तब पहुंच गया. लगभग डेढ़ गुना हो गया.

गेहूं की सरकारी खरीददारी की बात करें तो 2014 -15 में जो तकरीबन 86.53 मिलियन टन था वो अब बढ़कर 109.52 मिलियन टन आनुमानित है. यानी सरकारी खरीद में भी बढ़ोत्तरी हो रही है. किसानों को भी फायदा होगा.

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