एक एकड़ में 100 टन गन्ना, 50 से 60 लाख रुपए की सालाना कमाई, लेकिन कैसे? किसान ने खुद खोले अपने राज



 एक एकड़ खेत में वैसे तो 25 से 30 टन गन्ने का ही उत्पादन होता है, लेकिन एक किसान ऐसा भी है जो एक एकड़ में ही 100 टन गन्ना पैदा करता है और हर साल 50 से 60 लाख रुपए की कमाई भी करता है, लेकिन कैसे? क्या आप भी ऐसा कर सकते हैं? बिल्कुल कर सकते हैं. महाराष्ट्र के सांगली जिले की तहसील वालवा के कारंदवाडी गांव में रहते हैं किसान सुरेश कबाडे. सुरेश गन्ने की खेती अपने तरीके से करते हैं. उनकी तकनीकी की पूछ आसपास के कई राज्यों में होती है, और होगी भी क्यों नहीं, ये किसान जितना गन्ना एक एकड़ में पैदा करता है, दूसरे प्रदेश के किसान उतना गन्ना तीन एकड़ में पैदा कर पाते हैं.


प्रगतिशील किसान सुरेश कबाडे के हर गन्ने की लंबाई लगभग 20 फीट से ज्यादा होती है और उसका वजन भी कुछ नहीं तो कम से कम 4 किलो होता है. अब तो आप यह समझ ही गये होंगे कि यह किसान सालाना 50 से 60 लाख रुपए कैसे कमा लेता है.



आपको बता दें कि सुरेश का एक बेटा MBBSडॉक्टर है. उनके पिता भी गन्ना किसान थे लेकिन वे इतना उत्पादन नहीं कर पाते थे. उनके सपने को ही साकार कर रहे हैं सुरेश कबाडे. तो आइये देर नहीं करते हैं और आपको बताते हैं कि आखिर सुरेश ऐसी कौन सी विधि का प्रयोग करते हैं जिस कारण इतना ज्यादा उत्पादन हो पाता है.

खाद सबसे जरूरी

सुरेश ने टीवी9 हिंदी से कहते हैं कि गन्ने की खेती के लिए मिट्टी का चुनाव और उसका सही स्वास्थ्य बहुत जरूरी है. ऐसे में खाद की बड़ी भूमिका रहती है. सुरेश खाद के लिए अपने खेत की मिट्टी में सनई और ढैंचा से बने खाद का प्रयोग करते हैं, इसके अलावा रायजोबियम कल्चर, एजेक्टोबैक्टर और पूरक जीवाणु खाद का इस्तेमाल करते हैं. और सबसे अहम बात, वे गन्ना पहले ट्रे में उगाते हैं, उसके बाद उसे खेत में लगाते हैं. इससे गन्ने की फसल कम समय में तैयार हो जाती है.


लाइन से लाइन विधि से बुवाई

अहम और जरूरी बात कि सुरेश गन्ने की बुवाई लाइन से लाइन विधि से करते हैं. वे गन्ने की क्यारी की दूरी 5 से 6 फीट दूर रखते हैं. लाइन से लाइन विधि से लगाने का फायदा यह होता है कि खेत की जुताई ट्रैक्टर से बड़ी आसानी से हो जाती है और उर्वरकों के छिड़काव में दिक्कत नहीं आती. पौधे दूर रहते हैं इस कारण जड़ों को धूप भी आसानी से मिलती है. इसी कारण सुरेश के गन्ने की जड़ें बहुत मोटी होती हैं.


बीज का चयन कैसे

सुरेश कहते हैं कि गन्ने की खेती में ज्यादा उत्पादन के लिए बीज की चयन बहुत जरूरी है. ऐसे में वे टिशू कल्चर से खुद की किस्म तैयार करते हैं. वे हर साल 100 बेहतरीन पौधों में से एक का चुनाव करते हैं जिससे लैब में टिशू कल्चर से बीज तैयार कराते हैं. इसमें शुगर की मात्रा कम होती है जिस कारण फसल में रोग नहीं लगते और उत्पादन भी खूब होता है. वे इन बीजों को किसानों को बांटते हैं.

समय का खेल समझें

सुरेश कहते हैं कि गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए समय का ध्यान दिया जाना भी बहुत जरूरी है. पौधा लगाने के 30वें दिन जब अंकुर दिखने लगे तब पौधे के पास गड्ढा खोदकर जड़ों में जरूरी पोषक आहार डालने चाहिए फिर उसे ढंक देना चाहिए. इस प्रक्रिया को 65वें, 85वें, 105वें, 135वें. 165वें और 225वें दिन भी दुहराना चाहिए. जरूरत पड़ने पर पौधों से खराब हो चुकीं पत्तियों को अलग करते रहना चाहिए. सुरेश इन पत्तियों को फेंकते नहीं, बल्की गड्ढा खोदकर जमीन में गाड़ देते हैं जो आगे चलकर खाद में तब्दील हो जाता है, इस तरह वै जैविक खाद भी बना लेते हैं.


ऐसा बिल्कुल ना करें किसान

सुरेश किसान भाइयों को राय देते हुए कहते हैं कि कई राज्यों में किसान गन्ने को सीधा करने के लिए उसे बांध देते हैं, ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. गन्ने का भोजन उसकी पत्तियों में होता है और जब हरी पत्तियों से गन्ने को बांध दिया जाता है तो पत्तियों में जमा भोजन गन्ने को नहीं मिल पाता. पत्तियां सूख कर वहीं नीचे गिरती हैं, जिनके पोषक तत्व गन्ने में आ चुके होते हैं.

ये खबरें भी पढ़ें

  • रेलवे ने रातों रात लिया बड़ा फैसला, आज से 8 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का परिचालन शुरू
  • Punjab, Ludhiana, Jalandhar, Amritsar, Patiala, Sangrur, Gurdaspur, Pathankot, Hoshiarpur, Tarn Taran, Firozpur, Fatehgarh Sahib, Faridkot, Moga, Bathinda, Rupnagar, Kapurthala, Badnala, Ambala,Uttar Pradesh, Agra, Bareilly, Banaras, Kashi, Lucknow, Moradabad, Kanpur, Varanasi, Gorakhpur, Bihar, Muzaffarpur, East Champaran, Kanpur, Darbhanga, Samastipur, Nalanda, Patna, Muzaffarpur, Jehanabad, Patna, Nalanda, Araria, Arwal, Aurangabad, Katihar, Kishanganj, Kaimur, Khagaria, Gaya, Gopalganj, Jamui, Jehanabad, Nawada, West Champaran, Purnia, East Champaran, Buxar, Banka, Begusarai, Bhagalpur, Bhojpur, Madhubani, Madhepura, Munger, Rohtas, Lakhisarai, Vaishali, Sheohar, Sheikhpura, Samastipur, Saharsa, Saran, Sitamarhi, Siwan, Supaul,Gujarat, Ahmedabad, Vadodara, Surat, Rajkot, Vadodara, Junagadh, Anand, Jamnagar, Gir Somnath, Mehsana, Kutch, Sabarkantha, Amreli, Kheda, Rajkot, Bhavnagar, Aravalli, Dahod, Banaskantha, Gandhinagar, Bhavnagar, Jamnagar, Valsad, Bharuch , Mahisagar, Patan, Gandhinagar, Navsari, Porbandar, Narmada, Surendranagar, Chhota Udaipur, Tapi, Morbi, Botad, Dang, Rajasthan, Jaipur, Alwar, Udaipur, Kota, Jodhpur, Jaisalmer, Sikar, Jhunjhunu, Sri Ganganagar, Barmer, Hanumangarh, Ajmer, Pali, Bharatpur, Bikaner, Churu, Chittorgarh, Rajsamand, Nagaur, Bhilwara, Tonk, Dausa, Dungarpur, Jhalawar, Banswara, Pratapgarh, Sirohi, Bundi, Baran, Sawai Madhopur, Karauli, Dholpur, Jalore,Haryana, Gurugram, Faridabad, Sonipat, Hisar, Ambala, Karnal, Panipat, Rohtak, Rewari, Panchkula, Kurukshetra, Yamunanagar, Sirsa, Mahendragarh, Bhiwani, Jhajjar, Palwal, Fatehabad, Kaithal, Jind, Nuh, बिहार, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, कानपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, नालंदा, पटना, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, पटना, नालंदा, अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, कैमूर, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, नवादा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बक्सर, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुंगेर, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, शेखपुरा, समस्तीपुर, सहरसा, सारण सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, #बिहार, #मुजफ्फरपुर, #पूर्वी चंपारण, #कानपुर, #दरभंगा, #समस्तीपुर, #नालंदा, #पटना, #मुजफ्फरपुर, #जहानाबाद, #पटना, #नालंदा, #अररिया, #अरवल, #औरंगाबाद, #कटिहार, #किशनगंज, #कैमूर, #खगड़िया, #गया, #गोपालगंज, #जमुई, #जहानाबाद, #नवादा, #पश्चिम चंपारण, #पूर्णिया, #पूर्वी चंपारण, #बक्सर, #बांका, #बेगूसराय, #भागलपुर, #भोजपुर, #मधुबनी, #मधेपुरा, #मुंगेर, #रोहतास, #लखीसराय, #वैशाली, #शिवहर, #शेखपुरा, #समस्तीपुर, #सहरसा, #सारण #सीतामढ़ी, #सीवान, #सुपौल,

    Post a Comment

    0 Comments