नेता जी की मैडम पटना एयरपोर्ट से अरेस्ट, भागलपुर सृजन घोटाले की जांच में तेजी, CBI को 5 महिला आरोपियों की तलाश


srijan scam
भागलपुर में हुए सृजन घोटाले के मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। बीजेपी के नेता रहे विपिन शर्मा की पत्नी रूबी शर्मा को पटना एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि इंडिगो एयरलाइंस में वो किसी साहिल कुमार के साथ सवार हुई थीं। पटना एयरपोर्ट पर उतरते ही सीबीआई ने अरेस्ट कर लिया। रूबी शर्मा और भागलपुर से गिरफ्तार पूर्णेंदु कुमार चौबे को शुक्रवार को सीबीआई की अदालत में पेश किया गया। जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।

फरार आरोपियों में 5 महिलाएं शामिल
इससे पहले गुरुवार को विशेष न्यायिक दंडाधिकारी अनंत कुमार ने सृजन घोटाला मामले में (आरसी 6(ए)/18) सुनवाई करते हुए घोटाले से जुड़े आठ लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया था। इस गैर जमानती वारंट में रूबी कुमारी और पूर्णेंदु कुमार चौबे का भी नाम शामिल था। लेकिन इसके बावजूद संबंधित आरोपी कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे थे। जिसके बाद सीबीआई कोर्ट ने अमित कुमार की पत्नी रजनी प्रिया, प्रणव कुमार की पत्नी सीमा देवी, मोहम्मद शकील अहमद की पत्नी जेस्मा खातून, समर समरेंद्र की पत्नी राजरानी वर्मा, अभिषेक कुमार की पत्नी अर्पणा वर्मा, विपिन वर्मा की पत्नी रूबी कुमारी, पूर्णेदू कुमार चौबे और सतीश कुमार के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी ककिया था। फरार आरोपियों में सृजन संस्था की संस्थापिका मनोरमा देवी की बहू रजनी प्रिया भी हैं। रजनी प्रिया ही कार्यकारिणी की सचिव थीं।


भागलपुर के रसूखदार लोगों में शुमार विपिन शर्मा
बताया जाता है कि जिस मामले में कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की, वो 1 करोड़ 36 लाख 93 हजार रुपए से अधिक का है। सृजन घोटाले में आरोपी विपिन शर्मा भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे। वे भाजपा किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष थे, लेकिन आरोप के बाद उनको हटा दिया गया था। पदमुक्त होने के बावजूद विपिन शर्मा भाजपा के कई बड़े नेताओं के काफी करीबी रहे हैं। इससे पहले भी उनके यहां बड़े-बड़े नेताओं का लगातार आना-जाना लगा रहता था। विपिन शर्मा का भागलपुर में अपना बड़ा करोबार भी है। बताया जाता है कि विपिन शर्मा सृजन घोटाले की सूत्रधार मनोरमा देवी के काफी करीबी थे। उनके निधन के बाद विपिन शर्मा का मनोरमा देवी के बेटे अमित और बहू प्रिया से काफी ज्यादा नजदीकी संबंध रहा था।

सृजन का CA पूर्णेंदु कहलगांव से गिरफ्तार
सृजन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने गुरुवार को भी बड़ी कार्रवाई की थी। सृजन महिला विकास सहयोग समिति के सीए (Chartered Accountant) पूर्णेंदु कुमार चौबे को सीबीआई की टीम ने कहलगांव के सनोखर से गिरफ्तार किया। इससे पहले सीबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के अफसर, सुरक्षाबलों के साथ पूर्णेंदु के डिक्सन रोड स्थित इंदु मोहन स्मृति बिल्डिंग में गए थे। इस दौरान टीम को उसके सनोखर में होने की जानकारी मिली। बाकी 7 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सबौर, तिलकामांझी और दूसरे ठिकानों पर भी छापेमारी की थी।


घोटाले का 'बंटी-बबली' जोड़ी अबतक फरार
सृजन घोटाले का मास्टरमाइंड अमित कुमार और उनकी पत्नी रजनी प्रिया के बारे में कहा जा रहा कि दोनों नेपाल में नाम बदल कर रह रहे हैं। समय-समय पर इन दोनों का विशेष वाहन से रांची आने-जाने की भी बातें कही जा रही है। मनोरमा देवी को तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। इनकी बेटियों में कल्पना कर्ण, वंदना कर्ण और अर्चना लाल शामिल हैं। मनोरमा देवी ने बेटे-बहुओं और अपनी बेटियों के नाम से अकूत संपत्ति अर्जित की थी। डॉक्टर प्रणव अमीना अंसारी से शादी करने के बाद ऑस्ट्रेलिया में ही रहने लगे। मनोरमा के तीसरे पुत्र की मृत्यु हो चुकी है। तीसरी बहू सीमा कुमारी के पास इन दोनों की तुलना में उतनी संपत्ति नहीं है। मनोरमा के निधन के बाद लेन-देन का काम अमित और उसकी पत्नी प्रिया ही संभाल रही थी।

ED के रडार पर मनोरमा देवी से जुड़े 13 लोग
दूसरी ओर कुल 13 लोगों के खिलाफ ईडी ने नोटिस जारी कर संपत्ति अर्जित करने की जानकारी मांगी है। वहीं, ये सभी लोग, वो लोग हैं, जिनका मनोरमा के परिवार से सिर्फ लेन-देन का संबंध था। इनमें कुछ सरकारी कर्मी, व्यवसायी और रीयल एस्टेट के कारोबारी भी बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब सृजन के गुनहगारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी के रडार पर सबसे पहले सृजन की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी के परिवार के लोग हैं। ईडी ने मनोरमा देवी के परिवार के करीब नौ सदस्यों को नोटिस जारी कर संपत्ति खाली करने के आदेश भी दिए हैं।


रिमांड पर पीके घोष, उतरेगा चेहरों से नकाब
बिहार में करीब 2200 करोड़ रुपए के महाघोटाले में सृजन से जुड़े कई और अधिकारी-व्यापारी सहित अन्य लोग भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर हैं। अभी कुछ दिन पहले ही ईडी की गिरफ्त में आए भागलपुर के बड़े कारोबारी और सृजन के मास्टरमाइंड पीके घोष से पूछताछ के बाद ईडी के हाथ कई अहम सुराग भी लगे थे। सूत्रों के मुताबिक इनमें एक और कारोबारी भी हैं, जो सृजन घोटाले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। जबकि कुछ अहम सबूत मिलने के बाद ईडी इनके खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई करने वाली है। प्रवर्तन निदेशालय ने छह अगस्त को ही भागलपुर के प्रणव कुमार घोष को अपनी गिरफ्त में लिया था। इनके खिलाफ ईडी को पर्याप्त साक्ष्य भी मिले थे। बताया जाता है कि इन्होंने सृजन घोटाले में मुख्य साजिशकर्ता की भूमिका निभाई थी। गिरफ्तार पीके घोष सृजन महिला विकास सहयोग समिति में प्रोफेशनल टैक्स सलाहकार के रूप में काम करते थे। शुक्रवार को यानी 13 अगस्त को ईडी ने पीके घोष को पांच दिनों के लिए रिमांड पर लिया है।


अगस्त 2017 से सीबीआई कर रही जांच
सृजन घोटाले में प्राथमिकी दर्ज होने की शुरुआत 7 अगस्त 2017 को हुई थी। जबकि बिहार सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश 18 अगस्त 2017 को की थी। केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच से संबंधित अधिसूचना उसी महीने की 21 तारीख को जारी किया था। 26 अगस्त 2017 को सीबीआई की टीम भागलपुर पहुंची। इसके साथ ही सीबीआई के जिम्मे प्रखंड कार्यालयों के खातों से हुए घोटाले के केस सौंपे गए। करीब तीन साल बाद लगभग 99 करोड़ के गबन का एक नया मामला सामने आया।

क्या है भागलपुर का सृजन महाघोटाला
भागलपुर के सबौर में गरीब और नि:सहाय महिलाओं के उत्थान के लिए सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड की शुरुआत की गई थी। फिर इसके आड़ में घोटाले पर घोटाले किए जाते रहे। विभिन्न थानों में दर्ज प्राथमिकी से साफ पता चला है कि सबसे पहले जिला प्रशासन की नजारत शाखा से घोटाले की शुरुआत हुई थी। 16 दिसंबर 2003 से लेकर 31 जुलाई 2017 तक नजारत के खजाने से पैसे की अवैध निकासी होती रही। इसके बाद जिला पार्षद, फिर सहरसा, भागलपुर और बांका भू-अर्जन कार्यालय, कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग सहित कई विभागों के खातों से अवैध रूप से मोटी रकम की निकासी की गई। इसी दौरान प्रखंड कार्यालयों के खातों से भी गबन होने की शिकायत मिली थी।


कैसे हुआ सृजन महाघोटाले का खुलासा
2017 में अगस्त महीने में भागलपुर के जिलाधिकारी के हस्ताक्षर से जारी बैंक चेक को बैंक ने खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने की बात कहकर वापस कर दिया था। जबकि जिलाधिकारी को जानकारी थी कि बैंक खाते में पर्याप्त सरकारी पैसा है। लेकिन चेक वापस होने से उन्हें घोटाले की भनक लग गई। जिसके बाद उन्होंने इस मामले की जांच के लिए स्थानीय स्तर पर एक कमेटी बनाई। कमेटी ने अपनी जांच में पाया कि दो बैंकों में सरकारी पैसा है ही नहीं। यह जानकारी तत्काल सरकार को भेजी गई। इसके बाद घोटाले की कहानी परत दर परत खुलनी शुरू गई । इसी कड़ी में बिहार सरकार ने पहले आर्थिक अपराध इकाई से जांच कराई। लेकिन बाद में सृजन घोटाले की जांच सीबीआई के जिम्मे सौंप दी। सृजन महाघोटाले में महालेखाकार लेखा परीक्षक दल ने 2007 से 2017 के बीच की अवधि का विशेष ऑडिट किया था। इसी दरम्यान इसमें 99 करोड़ 88 लाख 69 हजार 830 रुपए की अतिरिक्त गबन का पता चला। जिसके बाद डीएम ने इस संबंध में छह मार्च को मुख्यालय को पत्र भेजा। इसी के आधार पर एससी-एसटी कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव ने प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

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