कोविशिल्ड के टीके से बन रहे हैं खून के थक्के? सरकार ने जारी की लक्षणों की लिस्ट

कोविशिल्ड के टीके से बन रहे हैं खून के थक्के? सरकार ने जारी की लक्षणों की लिस्ट


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत में एस्ट्राजेनेका का कोविड -19 टीका कोविशिल्ड लगवाने वाले लोगों में रक्त के थक्के जमने के मामलों की संख्या सामने आई है। मंत्रालय ने कहा है कि यह संख्या न के बराबर है। बता दें कि कोविशील्ड उन तीन वैक्सीन में से एक है जिसे भारत में आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। देश में कोविशिल्ड सबसे व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। इसे पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट (एसआईआई) ने बनाया है है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय एईएफआई समिति की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए एक बयान में कहा, "भारत में एईएफआई के आंकड़ों से पता चला है कि कोविशिल्ड लगवाने वालों में थ्रोम्बोम्बोलिक की (खून के थक्के जमने का ही बड़ा रूप) का बहुत ही कम लेकिन जोखिम है।"

थ्रोम्बोम्बोलिक घटनाओं में खून की नसों में जमे थक्के टूट कर दूसरी नसों में चले जाते हैं और वहां जाकर उसे ब्लॉक कर सकते हैं। साथ ही यह भी जानकारी दी गई है कि हर 10 लाख में से एक से भी कम व्यक्ति में ऐसी शिकायत मिली है।

मंत्रालय ने लोगों को संदिग्ध थ्रोम्बोम्बोलिक लक्षणों के बारे में जागरूक करने के लिए लक्षणों की एक लिस्ट जारी की है। मंत्रालय ने कहा, शॉट लेने के 20 दिनों के भीतर (विशेष रूप से कोविशील्ड) ये लक्षण होते हैं और लाभार्थियों को सलाह दी है कि ऐसा होने पर वे उस स्वास्थ्य सुविधा को रिपोर्ट करें जहां टीका लगाया गया था।

मंत्रालय की एडवाइजरी में बताए गए लक्षणों की सूची इस प्रकार है:

-सांस फूलना;

-सीने में दर्द;

-अंगों में दर्द/अंगों को दबाने पर दर्द या अंगों (हाथ या बछड़ा) में सूजन;

-इंजेंक्शन की जगह पर छोटे-छोटे लाल धब्बे


-बिना उल्टी के पेट दर्द या बिना पेट दर्द भी

-बिना उल्टी के या उल्टी के साथ दौरे आना, 

-उल्टी के साथ या बिना गंभीर और लगातार सिरदर्द 

-किसी विशेष अंग या शरीर के हिस्से में कमजोरी या फालिज

-बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार उल्टी होना

-धुंधला दिखना या आंखों में दर्द या दोहरा विजन होना

-मानसिक स्थिति में परिवर्तन या भ्रम या डिप्रेशन का होना-

कोई अन्य लक्षण या स्वास्थ्य स्थिति जो प्राप्तकर्ता या परिवार के लिए चिंता का विषय है।

एईएफआई समिति के अनुसार, इसने 498 ऐसे गंभीर मामले की समीक्षा पूरी की है, जिनमें से 26 मामले संभावित थ्रोम्बोम्बोलिक के मिले हैं। हर 10 लाख मामलों में 0.61 मामलों की रिपोर्टिंग दर के साथ थ्रोम्बोम्बोलिक की घटनाएं देखी गई हैं।

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