BCCI अध्यक्ष ने बताया, जब सुनील गावस्कर खेलते थे तब लोगों को होती थी किस बात की चिंता

राहुल द्रविड़ के साथ सौरव गांगुली- फाइल फोटो

भारतीय टीम में हमेशा से ही प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी उभरकर आते रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के दौरे और फिर घरेलू सीरीज में इंग्लैंड के खिलाफ युवाओं के खेलने सबको प्रभावित किया है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा कि भारत का भविष्य सही हाथों में है। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया में कभी भी प्रतिभा की कमी नहीं रही। जब पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर खेलते थे तब लोगों को इस बात की चिंता रहती थी कि उनके बाद कौन ऐसा प्रदर्शन करेगा।

गांगुली ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में अपार प्रतिभा है। जब (सुनील) गावस्कर थे, तो लोग सोचते थे कि उनके बाद क्या होगा, तब सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, अनिल कुबले आए थे। जब तेंदुलकर, द्रविड़ ने खेल को अलविदा कहा तो विराट कोहली, रोहित शर्मा और रिषभ पंत जैसे खिलाडि़यों ने टीम को संभाला।

गांगुली को पहली बार भारतीय टीम में ऑस्ट्रेलिया के 1992 के दौरे के लिए चुना गया था लेकिन तब उन्हें ज्यादा मौका नहीं मिला था। उन्होंने उस दौरे को याद करते हुए कहा कि मैं खुद के लिए 1992 की सीरीज को असफल मानता हूं। सच कहूं तो मुझे खेलने के ज्यादा मौके नहीं मिले और मैं ऑस्ट्रेलिया के दौरे से वापस आया, लेकिन मैं युवा था। उस सीरीज ने वास्तव में मुझे एक बेहतर क्रिकेटर बनने में मदद की।

मैं मानसिक रूप से मजबूत होकर वापस आया। मैं उस समय उतना फिट नहीं था, मैं समझ गया था कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट क्या है। मैंने न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी दबाव को संभालने के लिए तीन-चार साल के लिए खुद को प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया। जब मैं 1996 में इंग्लैंड गया, तो मैं बहुत मजबूत था। मुझे पता था कि अंतरराष्ट्रीय य स्तर पर रन बनाने के लिए क्या करना होता है।

सीने में दर्द की शिकायत के बाद जनवरी में कोलकाता के एक अस्पताल में एंजियोप्लास्टी के दो दौर से गुजरने वाले गांगुली ने कहा कि मैं बिल्कुल फिट और स्वस्थ हूं और काम पर वापस लौट आया हूं। मैं पहले जो काम करता था अब फिर से वह सब कर रहा हूं।

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