ऐसे लोगों के पास नहीं ठहरता है धन, आज ही छोड़ दें ये 5 काम



आचार्य चाणक्य की कुशाग्र बुद्धि और तार्किकता से सभी लोग प्रभावित थे। उनकी यही वजह है कि वह कौटिल्य कहे जाने लगे। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में विख्‍यात हुए। उन्‍होंने नीति शास्त्र की रचना की और इसके माध्‍यम से अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर कई महत्‍वपूर्ण बातें बताई हैं। साथ ही उन्‍होंने दुष्‍ट लोगों के बारे में कहा है कि दुष्ट लोगों से हमेशा बचना चाहिए। इनसे बचने के दो उपाय हैं। पैर में जूते पहनो और उन्हें इतना शर्मसार करो कि वे अपना सर न उठा सकें और आपसे दूर रहें। इसके अलावा उन्‍होंने कई अन्‍य अहम बातों की ओर भी ध्‍यान दिलाया है। आचार्य चाणक्य द्वारा वर्णित नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। आप भी जानें चाणक्‍य नीति की ये महत्‍वपूर्ण बातें-

ऐसे लोग धन से रहते हैं वंचित
चाणक्‍य नीति के अनुसार जो व्‍यक्ति अस्वच्छ कपडे़ पहनता है, जिसके दांत साफ नहीं हैं, जो बहुत खाता है, जो कठोर शब्द बोलता है और जो सूर्योदय के बाद उठता है। उसका कितना भी बड़ा व्यक्तित्व क्यों न हो, वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जायेगा।

दुष्ट लोगों से बचने के उपाय
आचार्य चाणक्य के अनुसार कांटो से और दुष्ट लोगों से हमेशा बचना चाहिए। इनसे बचने के दो उपाय हैं। पैर में जूते पहनों और उन्हें इतना शर्मसार करो कि वो अपना सर उठा न सकें और आपसे दूर रहें।

दौलत ही देती है साथ
चाणक्‍य नीति कहती है कि जब व्यक्ति दौलत खोता है तो उसके मित्र, नौकर, सम्बन्धी सब उसे छोड़कर चले जाते है और जब वह दौलत वापस हासिल करता है तो ये सब लौट आते हैं। इसीलिए दौलत ही सबसे अच्छा रिश्तेदार है।

पाप से कमाया धन साथ नहीं रहता
चाणक्‍य नीति कहती है कि पाप से कमाया हुआ पैसा दस साल रह सकता है। ग्यारवें साल में वह लुप्त हो जाता है। इसलिए अच्‍छे रास्‍ते से कमाया हुआ धन ही अच्‍छा होता है।

आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो सब व्‍यर्थ
आचार्य चाणक्‍य के अनुसार एक व्यक्ति को चारों वेद और सभी धर्मं शास्त्रों का ज्ञान है, लेकिन उसे अगर अपनी आत्मा की अनुभूति नहीं हुई, तो वह उसी चमचे के समान है, जिसने अनेक पकवानों को हिलाया, लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा।

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