कछुआ का प्रतीक रखे कमरे की इस दिशा में , होगा आपको लाभ ही लाभ




क्या आप भी चाहते है कि आपके घर धन की कभी कोई कमी न हो अगर हाँ तो हम आपके लिए ऐसी ही जानकारी लेकर आये है। वास्तु शास्त्र घर, प्रासाद, भवन अथवा मन्दिर निर्मान करने का प्राचीन भारतीय विज्ञान है जिसे आधुनिक समय के विज्ञान आर्किटेक्चर का प्राचीन स्वरुप माना जा सकता है।

जीवन में जिन वस्तुओं का हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होता है उन वस्तुओं को किस प्रकार से रखा जाए वह भी वास्तु है वस्तु शब्द से वास्तु का निर्माण हुआ है।


वास्तु तथा चाईनीज वास्तु अर्थात फेंगशुई शास्त्र के सिद्धांतों को अपनाकर व्यक्ति जीवन में सुख-समृद्धि और खुशियां पा सकता है तथा छोटे-छोटे उपाय अपनाकर अपनी सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है तथा सर्वदा के लिए धन और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी जी को भी अपने घर में स्‍थायित्व दिया जा सकता है।

अगर आपके निवास स्थल पर किसी प्रकार की कोई समस्या, दोष यां स्वास्थ्य विकार अथवा घर में बरकत न हो रही हो तो आप कुछ वास्तु और फेंगशुई शास्त्र के अचूक उपाय अपनाकर अपने जीवन की समस्याओं को समाप्त कर सकते हैं तथा अपने जीवन को समृद्ध और खुशनुमा बना सकते हैं।

कछुए का वास्तु व फ़ेंगशुई महत्व

कछुआ शांत और मंदगति से चलने वाला दीर्घजीवी प्राणी है। कछुए को सनातन धर्म के अनुसार शुभता का प्रतीक माना जाता है। चाईनीज वास्तु अर्थात फेंगशुई में कछुए को शुभता का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि कछुए के प्रतीक को घर में रखने से आर्थिक उन्नति होती है तथा घर में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है जिससे घर में रहने वाले सदस्यों की सेहत अच्छी रहती है। वास्तु तथा फेंगशुई में धातु यां स्फटिक निर्मित फेंगशुई कछुआ घर में रखते हैं।

कछुआ एक प्रभावशाली यंत्र है जिससे वास्तु दोष का निवारण होता है और खुशहाली आती है।


कछुए का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में कछुए को कूर्म अवतार अर्थात कच्छप अवतार कहकर संबोधित किया जाता हैं। धर्मानुसार भगवान विष्णु के दशावतार में से ‘कूर्म’ अर्थात कछुआ भगवान विष्णु का दूसरा अवतार है। पद्म पुराण के अनुसार कच्छप के अवतरण में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर के समुद्र मंथन के समय मंदरमंद्रांचल पर्वत को अपने कवच पर थामा था।

शास्त्रों में कच्छप अवतार की पीठ का घेरा एक लाख योजन का वर्णित किया गया है। इस प्रकार वासुकीनाथ श्री भगवान विष्णु के कच्छप अवतार ने मंदरमंद्रांचल पर्वत तथा श्री वासुकि अर्थात शेषनाग की सहायता से देवों एंव असुरों ने समुद्र मंथन करके चौदह रत्नों की प्राप्ति की इसलिए उसकी पूजा-अर्चना भी की जाती है और इसे शुभ माना जाता है।

कछुए को रखने के सिद्धांत


कछुआ का प्रतीक एक प्रभावशाली यंत्र है जिससे वास्तु दोष का निवारण होता है तथा जीवन में खुशहाली आती है।वास्तु तथा फेंगशुई में इसको स्थापित करने के कुछ सिद्धांत बताए गए हैं जिसे अपनाकर हम वास्तु की इस अमूल्य धरोहर से लाभान्वित हो सकते हैं। कछुए को घर में रखने से कामयाबी के साथ-साथ धन-दौलत का भी समावेश होता है। इसे अपने ऑफिस या घर की उत्तर दिशा में रखें। कछुए के प्रतीक को कभी भी बेडरूम में ना रखें। कछुआ की स्थापना हेतु सर्वोत्तम स्थान ड्राईंग रूम है।

ध्यान रखने योग्य बाते

दो कछुओं के प्रतीक एक साथ घर में ना रखें क्योंकि कछुए के प्रतीक एक साथ होने पर लाभ क्षेत्र बाधित होता है। कछुए की स्थापना हेतु उत्तर दिशा सर्वोत्तम है क्योंकि शास्त्रों में उत्तर दिशा को धन की दिशा माना गया है।

पूर्व दिशा की ओर भी कछुए के प्रतीक को स्थापित किया जा सकता है। कछुए का मुंह घर के अंदर की ओर रहे। कछुए को सूखे स्थान पर रखने की बजाय किसी बर्तन में पानी भर कर रखें। सात धातु से बना कछुआ वास्तु दोष दूर करता है और इसकी पूजा की जाती है, यह घर में सद्भाव और शांति देता है। इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। कछुआ की पीठ पर सात धातु से बना सर्व सिद्धि यंत्र साहस और समृद्धि देता है। इसे उत्तर-पूर्व दिशा में रखें।

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