जब मरने के बाद आत्मा स्वर्ग या नरक जाती है तो क्या वह पल हमें याद रहते हैं?



सवाल बेहद पेचीदा है इस सवाल का जवाब वैज्ञानिक रूप से तो व्यक्ति को तभी मिल सकता है जब हम मर जाए लेकिन आध्यात्मिक रूप से अगर हम सोचें और इस सवाल का जवाब देने की कोशिश करें तो धर्मों में इस सवाल का जवाब दिया गया है. आध्यात्मिक स्तर पर यदि हम ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करते हैं तो उस ज्ञान की पहली शर्त यह होती है कि हम एक विश्वास बनाए रखना होता है. यदि व्यक्ति के अंदर विश्वास नहीं है तो वह आध्यात्मिक रूप से बहुत सारी चीजों को नहीं समझ सकता है.

विज्ञान में सवाल उठाए जाते हैं और अध्यात्म में विश्वास बनाए रखना होता है. अध्यात्म अनुभूति का विषय है कि जिसको अनुभव किया जा सकता है जिसको की जीया जा सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब कोई व्यक्ति मर जाता है तो उससे निकली हुई जो आत्मा है वह जब स्वर्ग और नर्क में जा रही है क्या उन पलों को हम महसूस कर पाते हैं या फिर उन पलों को हम याद नहीं रख पाते हैं?

इसका जवाब अध्यात्म में कुछ इस तरीके से दिया गया है-

धार्मिक किताबें, बताती है कि जब आत्मा शरीर से निकल जाती है तो उसके बाद शरीर से जुड़ी हुई कोई भी बात उसको याद नहीं रहती है, सबसे पहले आत्मा अपनों को भूल जाती है कि वह किसके बच्चे हैं, कौन उनके माँ बाप थे उसे कुछ भी याद नहीं रहता है और यहां तक कि कई बार तो उसे यह भी याद नहीं रहता है कि उसने पिछले जन्म में क्या पाप और क्या पुण्य किए हैं.

आत्मा शरीर से निकलने के बाद सीधे अपने कर्म के हिसाब से स्वर्ग या नरक चली जाती है और वह हर चीज को केवल और केवल अनुभव में ले सकती है. आत्मा में मस्तिष्क या दिमाग नहीं होने की वजह से वह ज्यादा दिमाग नहीं लगा सकती है ना ही वह दर्द या सुख का अनुभव ले सकती है. आत्मा केवल अपने कर्मों के हिसाब से अपने पूर्व कर्मों का हिसाब करती है.

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