शिवरात्रि साल में कितनी बार आता है, महाशिवरात्रि पर पहने किस रंग के कपड़े और क्या नहीं करना चाहिए इस दिन




Mahashivratri 2021: महाशिवरात्रि का पर्व करीब है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन भगवान शंकर और माता पार्वती की विशेष पूजा करने की परंपरा है।

खासकर, अविवाहित लड़कियां इस दिन उपवास रखती हैं और भगवान शिव से अच्छे वर का आशीर्वाद मांगती हैं। इस दिन भगवान शंकर को बेल पत्र, धतूरा, बेर आदि अर्पित किए जाते हैं।


साथ ही रूद्राभिषेक और महा महामृत्युंजय मंत्र आदि का जाप किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन मंत्रों के जाप से कई प्रकार के कष्टों का निवारण हो जाता है। आईए जानते हैं महाशिवरात्रि से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब
Mahashivratri 2021: शिवरात्रि साल में कितनी बार आता है

महाशिवरात्रि का त्योहार साल में एक बार मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार ये फाल्गुन मास के कृष्ण की चतुर्दशी को पड़ता है। इस बार ये 11 मार्च को पड़ रहा है। वहीं हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।

इस तरह एक साल में 12 शिवरात्रि के त्योहार पड़ते हैं। इसी में फाल्गुन मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहते हैं।

इस बार चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 मार्च 2021 (गुरुवार) को दिन में 2 बजकर 39 मिनट से हो रही है। इस तिथि का समापन 12 मार्च (शुक्रवार) को दिन में 3 बजकर 2 मिनट पर होगा।

Mahashivratri 2021: महाशिवरात्रि पर पहने किस रंग के कपड़े

महाशिवरात्रि के दिन आप किसी भी रंग के कपड़े अपनी इच्छा के अनुसार पहन सकते हैं। हालांकि, काले कपड़ों को नहीं पहनना चाहिए। इसे शुभ नहीं माना जाता है। आमतौर पर हरे कपड़े पहने जाते हैं।

इसके अलावा श्वेत, पीले, नारंगी आदि रंग के कपड़े भी पहन सकते हैं। सूती कपड़े पहनना अच्छा रहता है। पुरुष धोती पहन सकते हैं। वहीं महिलाएं साड़ी पहन सकती हैं।
Mahashivratri 2021: महाशिवरात्रि पर क्या नहीं करें?

महाशिवरात्रि के दिन साधक को सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठे और स्नान आदि के बाद पूजा की तैयारियों में लग जाएं। अगर आप व्रत कर रहे हैं तो इस दिन दाल, चावल या गेहूं से बना भोजन ग्रहण नहीं करें।

काले कपड़े धारण नहीं करें। साथ ही भगवान शिव को अर्पित प्रसाद भी खुद नहीं खाना चाहिए। एक खास बात ये भी है कि भगवान शिव पर पूजा के दौरान भूल से भी तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए। साथ ही शिवलिंग पर हल्दी भी नहीं चढ़ाएं।

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