इस दिन से शुरू हो रहा है ‘खरमास’, जानिए क्या करें और क्या नहीं?




मार्च का महीना शुरू हो चुका है. इसी महीने से खरमास भी शुरू होने वाला है. हिंदू धर्म में खरमास का अपना विशेष महत्व है. खरमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, लेकिन इस महीने को धार्मिक और आध्यात्मिक लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. खारमास के दौरान पूजा-पाठ किया जा सकता है तो एक तरह से कह सकते हैं कि आपको इन दिनों पूजा-पाठ करने की पूरी तरह से आजादी है.

हालांकि, ज्यादातर लोगों को ये लगता है कि खरमास साल में सिर्फ एक बार ही आता है और वो भी 14 दिसंबर से 14 जनवरी के बीच. लेकिन क्या आप जानते हैं कि खरमास आखिर होता क्या है, ये कब-कब लगता है और इस दौरान आखिर कोई भी पूजा-पाठ या कोई शुभ कार्य करने की मनाही क्यों होती है?


क्या होता है खरमास?

सूर्य जब-जब बृहस्पति की राशि धनु और मीन में प्रवेश करता है तब ही खरमास होता है. ऐसा इसलिए होता है कि सूर्य की वजह से बृहस्पति निस्तेज हो जाते हैं. इसलिए खरमास में सभी तरह के शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे कार्य नहीं किए जाते. बता दें कि किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए बृहस्पति का होना अति आवश्यक होता है. खरमास के दौरान किसी भी तरह के नए कार्य की शुरुआत करना उचित नहीं माना जाता है.

कब से शुरू हो रहा है खरमास?


हिंदू पंचांग के मुताबिक, 14 मार्च 2021 दिन रविवार को जब सूर्य, कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे उसी दिन से खरमास की अवधि शुरू हो जाएगी. इसे सूर्य की मीन संक्रांति भी कहा जाता है और 1 माह के बाद 14 अप्रैल को जब सूर्य, मीन राशि से निकलकर मेष राशि में आएंगे तब खरमास समाप्त होगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, खरमास साल में दो बार लगता है, जब सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करता है.

खरमास के दौरान क्या-क्या करें?


खरमास के 1 महीने के समय को किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है लेकिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए ये समय सर्वश्रेष्ठ होता है. इस समय अगर आप दान-पुण्य करते हैं तो उसका फल अधिक ही प्राप्त होता है.

इस दौरान सूर्यदेव और भगवान विष्णु की पूजा की जानी चाहिए. ऐसा करने से ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है. इसके अलावा माता लक्ष्मी घर आती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

इस दौरान गरीबों को अन्न दान और वस्त्र दान करना चाहिए. इससे अशुभ ग्रहों की पीड़ा दूर होती है.

ये महीना जप-तप के लिए भी सर्वोत्तम माना जाता है और खरमास के दौरान अपने ईष्ट देव का ध्यान, पूजन, मंत्रों का जाप आदि करना लाभदायक माना जाता है.

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