उत्‍तराखंड में 1,2 नहीं पूरे 1700 भूतिया गांव, जानिए क्‍या है इसकी वजह



उत्‍तराखंड अक्‍सर खबरों में बना रहता है. कभी प्राकृतिक आपदा की वजह से तो कभी अपने पर्यटन और खूबसूरती की वजह से लेकिन इस राज्‍य की एक ऐसी कहानी भी है जो शायद ही आपको पता हो.

बड़े शहरों में बढ़ते रोजगार के विकल्‍प और गांवों में संसाधनों के अभावों के चलते अब लोग अपनी जमीन को छोड़कर जाने लगे हैं. बड़े स्‍तर पर होने वाले पलायन की वजह से इस राज्‍य के 1,2 नहीं बल्कि पूरे 1700 गांव खाली हो गए हैं. यही वजह है कि इन गांवों को अब भूतिया गांवों के तौर पर करार दिया जाने लगा है.
लॉकडाउन से लौटी थी थोड़ी रौनक

पिछले वर्ष कोरोना वायरस महामारी की वजह से लॉकडाउन लगाया गया. इस लॉकडाउन ने जहां देश के दूसरे हिस्‍सों में वीरानी ला दी तो उत्तराखंड के इन गांवों में रौनक लौटने लगी थी. करीब 300,000 लोग उत्‍तराखंड के अपने गांवों में वापस लौटने लगे.

लॉकडाउन खत्‍म होते ही गांव फिर से वीरान होने लगे. पौड़ी जिले के काललिखल ब्‍लॉक का बलूनी मगर वह गांव है जहां पर लॉकडाउन के बाद भी कोई वापस लौटा नहीं है.

उत्‍तराखंड का बलूनी वह गांव है जहां पर करीब ढाई साल पहले गांव के आखिरी निवासी श्‍यामा प्रसाद भी इसे छोड़कर चले गए थे. साल 2011 की जनगणना अनुसार इस गांव की आबादी बस 32 लोगों की ही थी. जनवरी 2018 को जब श्‍यामा प्रसाद गांव छोड़कर गए तो गांव पूरा वीरान हो गया.
आखिरी निवासी भी गांव से गए

श्‍यामा प्रसाद की उम्र 66 साल थी जब वह गांव छोड़कर गए थे. उत्‍तराखंड के गांव इस समय या तो पूरी तरह से खाली पड़े हैं या फिर वहां पर न के बराबर लोग रह रहे हैं. चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत का गांव साइना में सिर्फ दो ही परिवार बचे थे और लॉकडाउन की वजह से यहां के घरों में बिजली जलती हुई नजर आई थी.

बलूनी गांव को उत्‍तराखंड माइग्रेशन कमीशन की तरफ से भूतिया गांव घोषित किया गया था. राज्‍य में इस समय 1700 भूतिया गांव हैं जबकि 1000 गांव ऐसे हैं जहां पर 100 से भी कम लोग रहते हैं. कुछ ऐसा ही हाल अल्‍मोड़ा जिले के तहत आने वाले गांवों का है जहां पर 80 प्रतिशत से ज्‍यादा आबादी जा चुकी है.

राज्‍य के ज्‍यादातर गांवों में पानी की कमी हो चुकी है. सिर्फ इतना ही नहीं कई जगहों पर बेहतर सड़कों, स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं और शिक्षा जैसी सुविधाओं की भी कमी है. कई भूतिया गांव चीन से लगी लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास हैं.
चीन बॉर्डर के करीब हालात चिंताजनक

सितंबर 2018 में राज्‍य में पलायन आयोग यानी माइग्रेशन कमीशन की स्‍थापना हुई थी. इस आयोग की तरफ से साल 2019 में आंकड़ें जारी किए गए थे. इन आंकड़ों के मुताबिक 1700 में से 700 गांव ऐसे थे जो एक दशक के अंदर खाली हो गए थे.

इन गांवों के करीब 1.19 लाख अपने घरों को छोड़कर जा चुके थे. 50 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो रोजगार की तलाश में गांवों को छोड़कर गए थे. वहीं बाकी लोग शिक्षा और बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं के लिए गांव छोड़कर बड़े शहरों की तरफ गए थे.

70 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो इस राज्‍य को छोड़कर दूसरे राज्‍यों की तरफ गए थे. एलएसी यानी इंटरनेशनल बॉर्डर के करीब के गांवों की हालत बेहद ही चिंताजनक है.

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