सरकार नहीं झुकेगीः कृषि कानूनों पर विपक्ष का हमला, सत्ता पक्ष ने दिया कड़ा जवाब..|

सरकार नहीं झुकेगीः कृषि कानूनों पर विपक्ष का हमला, सत्ता पक्ष ने दिया कड़ा जवाब..|

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार से साफ है कि सरकार भी इस मुद्दे पर झुकने के मूड में नहीं दिख रही है। कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरते हुए किसानों को धोखा देने का आरोप लगाया। विपक्ष ने कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि सरकार आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रच रही है।

सरकार की ओर से विपक्ष को करारा जवाब देते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विभिन्न राज्यों और किसानों के साथ परामर्श करने के बाद ही तीनों नए कृषि कानून बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार इसे काला कानून बताने वाला विपक्ष यह तो स्पष्ट करे कि इसमें काला क्या है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि खून की खेती तो कांग्रेसी ही कर सकती है। हालांकि बाद में इसे लेकर काफी विवाद होने के बाद इसे राज्यसभा की कार्यवाही से हटा दिया गया।

सरकार को घेरने में विपक्ष एकजुट
कृषि कानूनों पर सरकार को घेरने में सबसे आगे कांग्रेस रही। हालांकि शिवसेना, अकाली दल, एनसीपी, सपा और वामदलों ने भी सरकार को घेरते हुए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। विपक्ष की मांग की थी व्यापक चर्चा के बाद ही नया कानून बनाया जाना चाहिए।

बदतर हालात के लिए सरकार जिम्मेदार
राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद देश में बदतर हालात के लिए सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में भी किसानों को अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है।

उन्होंने लालकिले में हुई घटना की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि ट्रैक्टर परेड में पुलिस कर्मियों पर हमले को भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने धरना स्थल पर बिजली, पानी और इंटरनेट सेवा बंद करने के सरकार के कदम को गलत बताया।

शिवसेना ने उठाए सवाल
कभी भाजपा की सहयोगी रही शिवसेना की ओर से भी सरकार पर बड़ा हमला बोला गया। शिवसेना सांसद संजय राउत ने लालकिले पर हंगामा करने वाले दीप सिद्धू की गिरफ्तारी न होने पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि उस दिन गिरफ्तार किए गए 200 से ज्यादा किसानों को देशद्रोह के मुकदमे में तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया जबकि आरोपी सिद्धू अब तक कर नहीं पकड़ा जा सका है। उन्होंने कहा कि आज देश में ऐसे हालात बन गए हैं कि सच बोलने और सच लिखने वाले को देशद्रोही और गद्दार बता दिया जाता है।

दिल्ली हिंसा की जांच कराने की मांग
एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि सरकार को यह सोचना चाहिए कि मौजूदा माहौल में अन्नदाता खुद को क्यों और असुरक्षित महसूस कर रहा है। अकाली दल के बलविंदर सिंह ने कहा कि सरकार ने मंडियों को खुला बाजार दे दिया और कांट्रैक्ट फार्मिंग भी दे दी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बड़ी कंपनियां आएंगी तब छोटा किसान उनसे कैसे मुकाबला कर पाएगा।

कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने लाल किले की घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज से कराने और दो महीने में रिपोर्ट देने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हिंसा कराने वाली ताकतों का पर्दाफाश जरूर होना चाहिए।

कोई तो बताए, कानून में काला क्या है
विपक्ष के आरोपों पर कड़ा जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मैं दो महीने से किसानों से यही सवाल पूछ रहा हूं कि कृषि कानून में काला क्या है ताकि उसे सुधारा जा सके मगर अभी तक मुझे ऐसे किसी भी प्रावधान का पता नहीं लगा जो किसानों के खिलाफ हो। उन्होंने कहा कि सरकार कानून में बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है मगर इसका मतलब यह नहीं है कि कृषि कानून में ही कमी है। विपक्ष के नेता भी अपनी बातों में यह स्पष्ट नहीं कर सके कि कानून के कौन से प्रावधान किसानों के खिलाफ हैं।

किसानों को बरगलाने का आरोप
उन्होंने कांग्रेस शासित राज्य पंजाब पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पूरा आंदोलन सिर्फ एक राज्य का है और यह अफवाहों और गलत सूचनाओं पर चलाया जा रहा है। किसानों को बरगलाया जा रहा है कि वे अपनी जमीन से हाथ धो बैठेंगे जबकि मौजूदा कानून में ऐसा कुछ भी नहीं है। विपक्षी की टोकाटाकी के बीच उन्होंने यहां तक कह दिया कि खेती के लिए पानी की जरूरत होती है। खून की खेती तो बस कांग्रेस ही करती है। यह काम भाजपा नहीं करती। हालांकि बाद में इसे लेकर विवाद होने पर इसे राज्यसभा की कार्यवाही से हटा दिया गया है।

मोदी बोले: कृषि मंत्री ने सबकुछ स्पष्ट कर दिया
सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कृषि मंत्री तोमर ने राज्यसभा में कृषि सुधार कानूनों से जुड़े हर पहलू को स्पष्ट किया है। उन्होंने हर किसी से निवेदन किया कि कृषि कानूनों पर अपनी गलतफहमी दूर करने के लिए उन्हें कृषि मंत्री का भाषण जरूर सुनना चाहिए।

नया प्रस्ताव ला सकती है सरकार
कृषि कानूनों पर लोकसभा में पिछले एक हफ्ते से जारी गतिरोध को दूर करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मंत्रणा भी की है। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के अलावा अन्य वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद थे। माना जा रहा है कि लोकसभा के गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार की ओर से कोई नया प्रस्ताव दिया जा सकता है।

गतिरोध खत्म होने के आसार नहीं
जानकारों का कहना है कि संसद में विपक्ष के हमलों का सरकार की ओर से तीखा जवाब दिया गया है। कृषि मंत्री ने खास तौर पर कांग्रेस को घेरते हुए एक बार फिर कृषि कानूनों को उचित बताने के साथ उसकी वकालत की है। सूत्रों के मुताबिक सरकार के रुख से साफ है कि वह कृषि कानूनों के मुद्दे पर झुकने के लिए तैयार नहीं है।

दूसरी ओर किसान संगठनों का रुख भी साफ और उन्होंने स्पष्ट तौर पर एलान कर रखा है कि उन्हें कृषि कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। ऐसे में कृषि कानूनों को लेकर पैदा हुआ गतिरोध जल्द समाप्त होने के आसार नहीं दिख रहे हैं।

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