कान पर दिखे ऐसा निशान तो सावधान, ‘कैंसर’ की हो सकती है शुरुआत..#



आज कल के खराब खान पान और खराब लाइफस्टाइल की वजह से लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें देखने को मिलती है। आज आपको इस लेख के जरिए हम कान के कैंसर के बारे में बताने जा रहे हैं। ताकि आप भी सावधान हो जाए तो कोई भी लक्षण देखते ही तुरंत अपना इलाज करवाना शुरु कर दें।

कानों में बदलाव

जब कान में कैंसर होने का खतरा होता है तो ये कैंसर सेल्स काफी तेजी से बढ़ते हैं और कानों में कई अलग अलग तरह के बदलाव होने लगते हैं।

डॉक्टर्स के मुताबिक कान में होने वाला कैंसर दो तरह का होता है। पहला क्लोस्टीटोमा और दूसरा स्कावमस सेल सार्किनोमा। ये दोनों प्रकार के कैंसर कान के अंदर होते हैं। इसके बाद ये धीरे-धीरे पूरी बॉडी में फैलने लगता है। अगर सही समय पर इसके संकेतों को पहचानकर ट्रीटमेंट ले लिया जाए तो इसके खतरे को टाला जा सकता है। नहीं तो आपकी जान भी जा सकती है।

हालांकि आपने बहुत कम कान के कैंसर के रोगियों के बारे में सुना होगा. मगर बता दें कि कान का ये कैंसर नाक या सिर के कैंसर की ही तरह होता है। जो कि त्वचा से होता हुए कानों में फैलता है। इतना ही नहीं यह बाह्य कान के अलावा ईअर के अंदरूनी कैनाल को भी प्रभावित करता है।

जब कैंसर कान के हिस्सों तक पहुंचने लगता है तो कान में अत्यधिक दर्द होना शुरु हो जाता है। कान में ट्यूमर के विकास से सुनने की क्षमता पर काफी असर पड़ता है। और धीरे धीरे रोदी के सुनने की क्षमता डेमेज हो जाती है। डॉक्टर्स का कहना है कि कान में कैंसर की समस्या अक्सर वृद्धावस्था में शुरु होती है।

कान का कैंसर

जैसा कि आपको पहले भी बताया कि कान का कैंसर दो तरह का होता है। पहला क्लोस्टीटोमा दूसरा स्कावमस सेल सार्किनोमा। ये दोनों प्रकार के कैंसर कान के अंदर विकसित होते हैं और बाद में ये धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलने लगते हैं। कान में होने वाले कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन का सहारा लिया जाता है। मगर उससे पहले जानना जरुरी है कि रोगी किस प्रकार के कैंसर से पीड़ित हैं और उसका पता इन लक्षणों से लगाया जाता है।

कान के कैंसर का एक लक्षण होता है कि रोगी के कान से पानी जैसा पदार्थ या खून निकलने लगता है। और इसकी वजह से कान में संक्रमण या खुजली होने लगती है। अगर आपको ऐसा लक्षण दिखाई देता है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

ईयरड्रम का डेमेज होना

जब कान में कैंसर का संभावना होती है तो मरीज के ईयरड्रम को क्षति पहुंचती है और कान से पीला व सफेद पदार्थ निकलता है। इसका मुख्य कारण है तेज ध्वनि, कान में बाह्य वस्तु का प्रयोग, इअर ट्रॉमा आदि।

कान में गांठ

आपके कान में किसी भी तरह का संक्रमण हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें क्योंकि ये कैंसर की तरफ संकेत करता है।यह एक गांठ की तरह होता है इसे ठीक होने में करीब 1 महीना तक लग जाता है। यह गांठ गुलाबी रंग की दिखती है।

न सुनने की समस्या

कान के कैंसर होने पर नरीज को पूरी तरीके से सुनाई देना बंद हो जाता है। इस तरह के मामलों में मरीज को अकसर सिर दर्द व चक्कर आने की शिकायत होती है। इसके अलावा मरीज के कानों का बजना, अलसर की शुरुआत व रक्त का निकलना जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं।

अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या हो ता नजरअंदाज न करें और सीधा डॉक्टर के पास जाकर अपना पूरा इलाज कराए।

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