पढ़ाई में फेल होते पर खेल में मेरिट लाते रहे, जिम्नास्ट ने 23 की उम्र तक जीते 166 मेडल





जिम्नास्टिक के नेशनल खिलाड़ी शुभम (23)।

शुभम 11वीं में अनुत्तीर्ण हुए, ग्रेजुएशन में दो बार बैक आई, पढ़ाई की कमी को पैशन से पूरा किया

आपने कहावत सुनी होगी- पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे खराब। लेकिन शहर के एक युवा खिलाड़ी ने इस कहावत को बदल दिया है। खिलाड़ियों में ऐसा जुनून कम ही देखने को मिलता है कि पढ़ाई में फेल होने पर भी वे खेल के अपने पैशन में मेडल्स की झड़ी लगा देते हैं। जोधपुर के जिम्नास्टिक के नेशनल खिलाड़ी शुभम (23) ने ऐसा ही कारनामा किया।

बात 9 साल पुरानी है। शुभम 11वीं कक्षा में आदर्श विद्या मंदिर स्कूल के छात्र थे। उन्होंने एसजीएफआई के नेशनल टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए परीक्षा ही नहीं दी। नतीजा आया और वे फेल हो गया, लेकिन कंपीटिशन में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने राजस्थान का नाम रोशन कर दिया। बात यहीं खत्म नहीं हुई।

जिम्नास्टिक में डूबे शुभम के वर्ष 2013 और 2014 में बीए प्रथम व द्वितीय वर्ष में भी बैक आई, लेकिन उस दौरान भी उन्होंने स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल हासिल किए। शुभम जिम्नास्टिक के ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके पास 56 राष्ट्रीय मेडल हैं। इनमें से 32 गोल्ड, 20 सिल्वर तथा 4 ब्रॉन्ज मेडल हैं। वहीं स्टेट लेवल की प्रतियोगिता में 110 पदक जीत चुके हैं।

प्रदेश का एकमात्र जिम्नास्ट जिसकी जॉब लगी
शुभम प्रदेश के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनका सलेक्शन राजस्थान पुलिस में वर्ष 2018 में खेल कोटे से सीधी भर्ती के दौरान हुआ था। शुभम ने जनवरी 2020 में पुणे में हुए नेशनल पुलिस गेम्स में भी गोल्ड मेडल हासिल किया था। राज्य में जिम्नास्टिक में अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनको अब तक करीब 10 लाख रु. की स्कॉलरशिप मिली है। शुभम नई पीढ़ी को भी जिम्नास्टिक में आने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इसके लिए वे अपनी ओर से हर तरह की मदद भी उपलब्ध करवाते हैं।
नए खिलाड़ियों की मदद में भी आगे
बैलेंस, शक्ति, लचीलेपन और धैर्य के इस खेल के खिलाड़ी शुभम दूसरों की मदद में भी पीछे नहीं रहते। कई बार जरुरतमंद खिलाड़ियों के पास कॉस्टयूम, इक्यूपमेंट आदि के पैसे नहीं होते। ऐसे खिलाड़ियों की मदद में भी शुभम पीछे नहीं रहते। अब शुभम का लक्ष्य वर्ल्ड कप 2022 अगला लक्ष्य है। इसके लिए उनकी तैयारी जारी है।

^ शुभम 11 साल से मेरे पास जिम्नास्टिक सीख रहा है। अब वह उसी मेहनत और लगन से अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा की तैयारी कर रहा है।

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