झुग्गी झोपड़ी में रहने वाला लड़का जब बना IPS, तब आस- पास के लोगों के उड़ गए होश...



हम आपको जिसके बारे में बता रहे है उनका नाम है नुरूल हसन,इस नाम को काफी काम लोग जानते थे,पर यूपीएससी साल 2015 की परीक्षा परिणाम आने के बाद लोगो के बिच उनकी एक नायब पहचान बन गयी, नुरुल अब एक आईपीएस अफसर है,पर नुरुल के लिए यहाँ तक पहुंचना इतना आसान नहीं था, उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है नुरूल का बचपन एक मलिन झुग्गी बस्ती में बीती उन्होंने पढ़ाई भी एक सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल से की थी। पर इन सब में जो सबसे ख़ास और महंगा था,वो था उनका जज़्बा और कड़ी मेहनत जिस के दम पर आज लोगो के बीच उनकी चर्चा है । नुरुल हसन को ज़िन्दगी ने सब कुछ थाली में परोस कर नहीं दिया, नुरूल के पिता बरेली में सरकारी कार्यालय में पियोन रहे उनका परिवार काफी गरीब था,शुरूआती शिक्षा जैसे तैसे हुयी,और कोचिंग के पैसे के लिए भी कफी मशक्कत करनी पड़ी.

बता दे की उन्होंने बरेली से ही 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की उन्हें अखबार पढ़ने का शौक लग गया था पर वो महीने के 250 रुपये भी नहीं दे सकते थे जिसके चलते पास के ही ढ़ाबे पर जाकर अखबार पढ़ा करते थे। नूरुल का सेलेक्शन एएमयू में हुआ था बीटेक करने के दौरान ही उन्हें सिविल सेवा के बारे में पता चला उन्होंने जानकारी जुटाई और साथ के साथ इसकी तैयारी भी शुरू कर दी जिसके बाद उनकी नौकरी गुरुग्राम स्थित कंपनी लग गई। इसके बाद में Bhabha Atomic Research Centre में ग्रेड 1 अधिकारी के रूप में जॉइन किया।

नौकरी के बाद उन्होंने सोचा था कि उतना ही काम करू जितना कि तैयारी करने में आसानी हो और साल 2012 में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी.पर अभी भी परेशानियों ने पीछा नहीं छोड़ा, और जब उनकी तैयारी के लिए कोचिंग जॉइन करने गए तो उनसे फीस के रूप में मोटी रकम मांगी गई,तक नुरुल ने बिना कोचिंग के ही पढ़ने का फैसला लिया, परीक्षा पास करने तक वो कभी कोचिंग नहीं गए

और साल 2015 की परीक्षा में उन्हें ऑलओवर 625वीं रेंक के साथ सफलता मिली। उनकी मेहनत रंग लायी और आज वो आईपीएस है, नुरूल हसन उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के रहने वाले हैं,उन्होंने अपनी मेहनत और सच्ची लगन से ना सिर्फ अपना जीवन बदला,बल्कि अपने परिवार का भी जीवन बदला, आज उनके पिता समेत उनका पूरा परिवार उन पर गर्व करता है।

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