वह महिला IPS जिसने मुख्यमंत्री तक को गिरफ्तार किया था, लोग इनकी बहादुरी की मिशाल देते हैं: IPS रूपा मुदगिल



रूपा ने “नम्मा बेंगलुरु फाउंडेशन” संस्था द्वारा दिया जाने वाला अवार्ड को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि, “हर सरकारी कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह तटस्थ रहें। जिन संस्थाओं के थोड़े से भी राजनीतिक ताल्लुकात हैं, उनसे सामान दूरी बनाए रखने के साथ हीं उनके प्रति तटस्थ भी रहना चाहिए।”

यदि कोई इमानदार है तो उसे सराहना कम मिलेगी लेकिन कई बार अग्नि परीक्षा से गुजरनी पड़ती है। रूपा को भी हर बार इमानदारी से ड्यूटी निभाने के लिए गुजरना पड़ा। शशिकला केस ने जब तूल पकड़ा तो तुरंत हीं डी. रूपा का ट्रांसफर कर दिया गया। 2017 तक अर्थात् 17 वर्षों में रूपा का 41 बार ट्रांसफर हुआ।

इसके अलावा शशिकला केस में जिस DGP सत्यनारायण राव पर रूपा ने आरोप लगाया था कि जेल में VIP ट्रीटमेंट देने के लिए 2 करोड़ की राशि घुस ली गई है उसमें राव भी शामिल है, उसने रूपा पर 20 लाख की मानहानि का केस किया था। इतना सब होने के बाद भी रूपा अपने कर्तव्य से मुख नहीं मोङीं और ना ही किसी सियासतदानों के सामने झुकीं।


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