16 साल की उम्र में खो दी थी सुनने की शक्ति अब 23 साल की उम्र में IAS बनी सौम्या शर्मा..|




कहते है कि मन में अगर कुछ बड़ा करने की चाह हो तो कोई भी इंसान बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकता है. फिर चाहे वह बड़ी से बड़ी तकलीफ से क्यों न जूझ रहा हो, अपनी मंजिल पा ही लेता है. आज हम ऐसी ही एक महिला आईएस की कहानी लेकर आये हैं, जिसने 16 साल की उम्रे में सुनने की क्षमता खो दी थी. जिस दिन उन्हें यूपीएससी की परीक्षा देने जाना था उन्हें 103 डिग्री बुखार था फिर भी परीक्षा दी और आज आईएस बन देश का गौरव बढ़ा रही हैं.

साल 2017 में आईएस बनी सौम्या शर्मा की संघर्ष भरी कहानी किसी भी इंसान के लिए प्रेरणा भर सकती है. आज के इस खास लेख में हम चर्चा करेंगे 16 साल की उम्र में सुनने की क्षमता खोने से लेकर एक आईएएस ऑफिसर बनने तक के सफर के बारे में


16 साल की उम्र में खो दी थी सुनने की क्षमता आज हैं आईएएस

दिल्ली की रहने वाली सौम्या शर्मा ने 16 साल की उम्र में सुनने की क्षमता खो दी थी. उनके माता पिता दोनों ही डॉक्टर है. फिलहाल सौम्या सुनने के लिए कान की मशीन का उपयोग करती है. उन्होंने महज 23 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली थी. अपना ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने साल 2017 में नेशनल लॉ स्कूल से अपनी एलएलबी की डिग्री पूरी की है.


आपको जानकार हैरानी होगी की उन्होंने खुद को विकलांग कोटे में न रखकर समान्य श्रेणी में रहकर परीक्षा देने का फैसला किया था. इसके साथ ही उन्होंने बिना किसी कोचिंग की सहायता के यूपीएससी की परीक्षा पास की है.
परीक्षा के दिन था 103 डिग्री बुखार

आपको बता दें सौम्या शर्मा को परीक्षा के समय 102 डिग्री बुखार से जूझना पड़ा था उनकी हालत इतनी ख़राब था की कभी- कभी तो उन्हें ड्रिप लगानी पड़ जाती थी. उनके बुखार ने उनके शरीर पर इस तरह कब्ज़ा कर रखा था कि परीक्षा के दिन भी उन्हें 103 डिग्री बुखार था. फिर भी वह यूपीएससी की परीक्षा देने गयी और सफल हुईं. उनके साहस को उनका बुखार तोड़ नहीं पाया. आज सौम्या शर्मा यूपीएससी के सपने देखने वालों के लिए एक मिशाल हैं.
9 वीं रैंक के साथ पहले प्रयास में आईएस बनी सौम्या शर्मा

आपको जानकर खुशी होगी की उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में देश की सबसे कठिन परीक्षा को पास कर लिया. उन्होंने दिन रात कड़ी मेहनत करके आईएएस जैसे सम्मानित पद को हासिल किया है. आज के समय में यूपीएससी की तैयारी करने वाले परीक्षार्थियों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए, अगर आपके मन में इस मुकाम को हासिल करने की सच्ची लगन है तो आप बड़ी से बड़ी परीक्षाओं को पास कर सकते है.

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