UP में चार चरणों में होंगे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव, हर वोटर को मिलेंगे 4 मतपत्र, इस महीने की डेट लगभग फाइनल



उत्तर प्रदेश में इस बार चार चरणों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (UP Panchayat Election) होंगे। ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव एक साथ होंगे। शासन ने पंचायत चुनावों कराने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी प्रारंभ कर रखी है। सरकार की मंशा मार्च 2021 में पंचायत चुनाव कराने की है। कोशिश है कि 31 मार्च तक चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। पंचायतराज विभाग की अभी तक की तैयारियों के मुताबिक फरवरी के अंतिम सप्ताह में चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है। वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया फरवरी के तीसरे सप्ताह तक पूर्ण कर ली जाएगी। पिछली बार ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य के चुनाव एक साथ हुए थे। क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य के चुनाव अलग से हुए थे। इस बार समय बचाने के लिए चारों पदों के चुनाव एक साथ कराने की तैयारी है। यानी एक मतदाता को इस बार चार बैलेट पेपर पर मुहर लगानी होगी। मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रत्येक पोलिंग स्टेशन पर ग्राम प्रधान-ग्राम पंचायत सदस्य और बीडीसी-जिला पंचायत सदस्य के लिए अलग-अलग बूथ बनाए जाएंगे। प्रत्येक बूथ में वोटर को दो बैलेट पेपर देकर भेजा जाएगा।

कोरोना के चलते चुनाव में देरी

दरअसल वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते प्रदेश में पंचायत चुनाव समय से नहीं हो पाए हैं। प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत का कार्यकाल क्रमश: 25 दिसंबर, 14 जनवरी और 18 मार्च को समाप्त हो रहा है। 25 दिसंबर को आधी रात से ग्राम पंचायतें भंग हो जाएंगी। ग्राम पंचायतों में 26 दिसंबर से विकास खंडों के सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ पंचायत) को प्रशासक नियुक्त कर दिया जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा होने पर जिलाधिकारी और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष (ब्लाक प्रमुख) का कार्यकाल पूरा होने पर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को प्रशासक तैनात किया जाएगा। त्रिस्तरीय पंचायतों के वार्डों का आरक्षण फरवरी के तीसरे सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। पिछली बार क्षेत्र पंचायतों व जिला पंचायतों का आरक्षण चक्रानुक्रम में किया गया था जबकि ग्राम पंचायतों के आरक्षण की शून्य से शुरुआत हुई थी। इस बार आरक्षण का क्या फार्मूला होगा, यह जल्द ही तय हो जाएगा। वार्डों का आरक्षण पूरा होने पर शासन इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को देगा। इसके बाद आयोग कभी भी चुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। राज्य सरकार चार चरणों में चुनाव कराना चाहती है।


यूपी में 28 नई नगर पंचायतों का गठन, नगर निकायों की संख्या भी बढ़ी

प्रदेश में 28 नई नगर पंचायतों का गठन कर दिया गया है, साथ ही गोरखपुर व वाराणसी नगर निगमों समेत कुल 21 अन्य नगर निकायों के सीमा विस्तार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इन पर फैसला लिया गया, जिसके बाद अब प्रदेश में नगर निकायों की संख्या बढ़कर 735 हो गई हैं। जिन नई नगर पंचायतों का गठन हुआ है वह हैं- खिरौनी-सचित्तागंज व कुमारगंज (अयोध्या), रामसनेही घाट (बाराबंकी), असोथर (फतेहपुर), कंचौसी (कानपुर देहात), चरवा (कौशांबी), रामगंज (प्रतापगढ़), ढकवा (प्रतापगढ़), सूजाबाद (वाराणसी), महमूदपुरमाफी (मुरादाबाद), सैदनगली (अमरोहा), जवां सिंकन्दरपुर, गभाना, चौक (महराजगंज), टप्पल व बरौली (अलीगढ़), मऊ (चित्रकूट), कैसरगंज(बहराइच), राजेसुल्तानपुर व जहांगीरगंज (अंबेडकर नगर), रतसड़कला (बलिया), कप्तानगंज, मुंडेरवा व नगर बाजार व गणेशपुर (बस्ती), रटौल (बागपत), अचलगंज (उन्नाव), कलान (शाहजहांपुर)।

सीमा विस्तार की बात करें तो वाराणसी नगर निगम की सीमा में 9 राजस्व ग्रामों को शामिल करते हुए सीमा का विस्तार किया गया है। वहीं गोरखपुर नगर निगम में एक राजस्व ग्राम को शामिल करते हुए सीमा विस्तार किया गया है। नगर विकास विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, 77 राजस्व गावों को शामिल करते हुए 12 नगर पंचायतों का सीमा विस्तार किया गया है। 276 राजस्व गांवों को शामिल करते हुए 28 नई नगर पंचायतों का गठन किया गया है। इसके साथ ही 102 राजस्व गांवों को शामिल करते हुए नौ नगर पालिका परिषदों की सीमा बढ़ाई गई है।


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