शनिदेव की पूजा में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए



शनिवार के दिन शनि देव की पूजा शुभ फलदाई होती है। कुंडली में शनि संबंधित जैसा भी बुरा प्रभाव चल रहा हो इस दिन विशेष उपाय और पूजन करने से राहत मिलती है। शनि की दशा एक बार शुरू हो जाए तो इसका प्रभाव एक राशि पर ढ़ाई वर्ष और साढ़े साती के रूप में लंबी अवधि तक भोगना पड़ता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो तो उसे कई प्रकार के बुरे प्रभाव झेलने पड़ते हैं और जीवन में छोटी-छोटी सफलताओं के लिए भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। शनि कि भक्ति शारीरिक, पारिवारिक, सामाजिक, मानसिक, आर्थिक, प्रशासनिक समस्याओं की पीड़ा का हरण करती है। शनि से संबंधित किसी भी तरह की चिंता का निवारण करना हो तो शनि मंत्र, शनि स्तोत्र विशेष रूप से शुभ रहते हैं। शनि की पूजा करते समय रखें कुछ बातों का ध्यान-

सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद की गई शनि पूजा लाभ देती है।

शांत मन से शनि पूजा करें।

तांबे के बर्तनों का यूज न करें। लोहे की वस्तुओं को शनि पर अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं।
 

ध्यान रखें, जब शनिदेव पर तेल चढ़ाएं तो वह इधर-उधर न गिरे ।

शनि मंत्रों का जाप करते वक्त अपना मुंह पश्चिम दिशा में रखें।

लाल वस्त्र, फल-फूल शनि को नहीं चढ़ाने चाहिए। नीले या काले रंग की वस्तुओं का प्रयोग करना शुभ होता है।


शनि प्रतिमा का दर्शन सामने से न करें, साइड से करें।

शनि मंदिर जाने से पहले अथवा शनिदेव की पूजा के वक्त स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें।

शनिदेव के उस मंदिर में जाएं जहां वह शिला के रूप विराजमान हों।



शनिवार के दिन सिर्फ सात्विक आहार लेना चाहिए।

शनि की पूजा पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर करना शुभ होता है।


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