अंडा वेज या नॉनवेज? इस सवाल का जवाब वैज्ञानिकों ने खोज निकाला...



अंडे में तीन परते होती हैं. पहली छिल्का, दूसरी सफेदी और तीसरा अंडे की जर्दी यानी योक. योक मतलब पीला हिस्सा. अंडे पर की गई एक रिसर्च के अनुसार इसकी सफेदी में ही सिर्फ प्रोटीन ही होता है. इसमें जानवर का कोई भी हिस्सा मौजूद नहीं होता है.

ददन विश्वकर्मा/नई दिल्ली: संडे हो या मंडे रोज खाओ अंडे. जी यह बात हम आप बचपन से सुनते आ रहे हैं. अंडे खाने बहुत सारे फायदे हैं. कुछ लोग कच्चा अंडा खाना पसंद करते हैं, जबकि कुछ बॉइल एग को प्रेफरेंस देते हैं. वहीं सेहत को लेकर फिक्रमंद लोग अंडे का सफेद हिस्सा खाना पसंद करते हैं क्योंकि यह प्रोटीन से भरपूर माना जाता है.

मुर्गी नॉनवेज इसलिए अंडा भी नॉनवेज

ये तो हो गई अंडा खाने के फायदे वाली बात है. कुछ लोगों का मानना है कि यह नॉनवेज कैटिगरी में आता है क्योंकि इसे मुर्गी देती है. इस सवाल का जवाब जवाब वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है. इस पर वैज्ञानिकों एक थ्योरी भी दी है, हालांकि कुछ ऐसे लोग भी उनकी इस थ्योरी को सही नहीं ठहरा रहे हैं.

पहले लोगों के तर्क जानिए. शाकाहारी लोग मानते हैं कि अंडा मुर्गी देती है इसलिए वह नॉन-वेज माना जाएगा. हालांकि लोगों के इस तर्क को विज्ञान झूठा साबित करता है. इसके पीछे वैज्ञानिकों का तर्क है कि दूध भी जानवर से आता है तो वो कैसे शाकाहारी हो गया?

इसलिए अंडा हुआ शाकाहारी

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अंडे से चूजा निकलता है इसलिए यह मांसाहारी है. जबकि बाजार में मिलने वाले सारे अंडे अनफर्टिलाइज्ड होते हैं. यानी इन अंडों से कभी भी चूजे बाहर नहीं निकलते. इस बात की गलतफहमी दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने भी साइंस के जरिए इस सवाल का जवाब तलाशा है. अगर इस तर्क को मान लिया जाए तो अंडा शाकाहारी हुआ.

अंडे का सफेद हिस्सा वेज होता है- वैज्ञानिक

अंडे में तीन परते होती हैं. पहली छिल्का, दूसरी सफेदी और तीसरा अंडे की जर्दी यानी योक. योक मतलब पीला हिस्सा. अंडे पर की गई एक रिसर्च के अनुसार इसकी सफेदी में ही सिर्फ प्रोटीन ही होता है. इसमें जानवर का कोई भी हिस्सा मौजूद नहीं होता है. इसलिए तकनीकी रूप से एग वाइट यानी सफेदी वेज होती है.

गैमीट सेल्स की वजह से नॉनवेज कहलाता है अंडा

एग वाइट की ही तरह एग योक यानी जर्दी में भी प्रोटीन के साथ कोलेस्ट्रोल और फैट अच्छी मात्रा में मौजूद होता है. अंडा मुर्गी और मुर्गे के संपर्क में आने के बाद ही पनपता है. उनमें गैमीट सेल्स होते हैं जो उसे मांसाहारी बना देते हैं. जबकि बाजार वाले अंडों में ऐसा कुछ नहीं होता है.

6 महीन में मुर्गी देने लगती है अंडे

मुर्गी 6 महीने होने के बाद से अंडे देने लगती है. वह हर 1 या डेढ़ दिन में अंडे देती है, लेकिन बता दें कि ऐसा बिल्कुल नहीं होता कि मुर्गी किसी भी मुर्गे के साथ संपर्क में जरूर आए. इन अंडों को ही अनफर्टिलाइज्ड एग कहा जाता है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इनमें से कभी चूजे नहीं निकल सकते. इसलिए मार्केट में मिलने अंडे शाकाहारी कैटिगरी में ही गिन जाएंगे.

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