अगर खाते है मछली तो , इनके बारे यह बातें जानकार हैरान हो जायेंगे आप...


सदियों से हम इंसान मछली खा रहे हैं। एक दौर था जब मछली केवल भूख शांत करने के लिए ही खाई जाती थी। लेकिन इंसान ने जैसे-जैसे तरक्की की वैसे ही उसने अपने खान-पान से अपने शरीर को होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में जानना-समझना शुरू कर दिया। मछली खाने से हमें क्या-क्या फायदे होते हैं इसका ज़िक्र हम आपसे पहले भी कई दफा कर चुके हैं। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसी पॉप्युलर मछलियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं जिन्हें दुनियाभर में काफी ज़्यादा पसंद किया जाता है।

ये मछली पैसिफिक महासागर में बहुतायत में पाई जाती है। पश्चिमी देशों के लोग इस मछली के मांस को बड़े ही चाव से खाते हैं। अमेरिका के तटीय इलाकों में तो कई फूड ट्रक्स पर इस मछली से बने फूड आयटम्स ही मिलते हैं।

इस मछली को तो आप भी पहचानते होंगे। भारत के देहाती इलाकों में ये मछली बहुतायत में पाई जाती है। इसे सोली मछली कहा जाता है। पश्चिमी देशों में मछुआए इस मछली को बड़ी मछली का शिकार करने के लिए चारे की तरह इस्तेमाल करते हैं। अंग्रेजी में इस मछली को एन्कोवी मछली कहा जाता है। इस मछली की एक खासियत ये है कि ये ताजे पानी में भी ज़िंदा रह लेती है और खारे पानी में भी।

ये मछली भी महासागरों में ही पाई जाती है और ये भी एक प्रकार की तैलीय मछली है। हालांकि जापान में इस मछली को लोग ऐसे ही खाना अधिक पसंद करते हैं लेकिन कई जापानी कंपनियां इस मछली से मिलने वाले तेल से विभिन्न उत्पाद बनाकर भी बेचती हैं।

इस मछली को आप पहचानते होंगे। शहरों में मछली बेचने वाले ठेलों पर इन्हें ही लेकर अधिकतर घूमते हैं। ठेलों पर रखे ड्रम में ढेर सारी मछलियां होती हैं और थोड़ा सा इनमें पानी होता है। हिंदी भाषी क्षेत्रों में इन्हें सिंघाड़ा मछली के नाम से जाना जाता है।

समंदर में पाया जाने वाला एक बेहद अनोखा जीव होता है झींगा। समंदर में इसके जैसा एक जीव और पाया जाता है। वो जीव बहुत हद तक झींगे जैसा ही दिखाई देता है। लेकिन वो वास्तव में झींगा नहीं बल्कि श्रिम्प होता है। इनकी शारीरिक संरचनाओं में और पूर्ण वयस्क होने पर इनके आकार में भी बहुत अधिक अंतर होता है। हालांकि इंसान इन दोनों जीवों को ही खाता है।

झींगों को दुनियाभर में बड़ी तादाद में लोग खाते हैं। भारत में भी झींगे खाने वालों की कमी नहीं है। इस वक्त स्क्रीन पर जो आप देख रहे हैं ये झींगे के बच्चे हैं। ये काफी पौष्टिक होते हैं।

ये मध्यम आकार की एक मछली होती है जो बंगाल और बांग्लादेश में बेहद लोकप्रिय है। इस मछली को इन इलाकों के लोग बेहद चाव से खाते हैं। ये मछली आमतौर पर नदियों में होती है। हालांकि कुछ मछली पालकों ने इसे तालाबों में पालना भी शुरू कर दिया है। बाज़ार में ये मछली 250 रुपए किलो की दर से बेची जाती है।

ये तैलीय मछली की एक प्रजाति है। महासागरों में पाई जाने वाली ये मछली विभिन्न प्रकार के इस्तेमालों के लिए बनने वाले तेल के लिए पकड़ी जाती है। इस मछली में 30% तक सिर्फ तेल ही होता है। हालांकि लोग इसको खाना भी पसंद करते हैं और खूब खाते भी हैं।

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