‘दुनिया हैरान’! यह साधु 70 वर्षों तक “बिना अन्न-जल” के रहा , 35 डॉक्टरों की टीम ने निरीक्षण किया


न : गांव चरदा, मेहसाणा जिला गुजरात ।

“प्रहलाद जानी” का जन्म 13 अगस्त 1929 को हुआ था और इन्होंने 26 मई 2020 को शरीर छोड़ा। यह एक ‘भारतीय’ साधु थे।जिनका दावा था कि, 1940 से, वे ‘बिना भोजन और बिना पानी’ के रह रहे हैं। दिन में मात्र एक बार, ‘सूर्य के प्रकाश’ में कुछ समय रहने की आवश्यकता महसूस होती थी। उसी सूर्य द्वारा प्राप्त उर्जा से उनके शरीर को ऊर्जा प्राप्त होती थी। उनका मानना था कि, ‘देवी अंबा’ उनका पालन पोषण कर रही है। माता के भक्त होने के नाते, वे महिलाओं के वस्त्र जो कि, लाल रंग के हुआ करते थे, पहनते थे।


यह बेहद आश्चर्यजनक एवं अविश्वसनीय घटना होने के कारण, भारत सरकार ने सन 2003 में 10 दिनों तक, डॉक्टर सुधीर शाह के नेतृत्व में अहमदाबाद के ‘स्टर्लिंग हॉस्पिटल’ में इन पर शोध किया गया । शोध के दौरान प्रहलाद जानी, किसी प्रकार का अन्न जल फल इत्यादि का कोई सेवन नहीं किया।  ना ही वह मल मूत्र त्याग के लिए कभी नहीं गए।  लेकिन, उनका शरीर सामान्य रूप से कार्य कर रहा था।


सन 2010 में एक बार पुन:, उनका परीक्षण 22 अप्रैल से 6 मई के मध्य किया गया। इस बार भी डॉक्टर सुधीर शाह के नेतृत्व में ‘इंडियन डिफेंस इंस्टीट्यूट आफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेज’ के 35 शोधकर्ताओं की एक टीम ने 15 दिनों तक, उनका परीक्षण किया। इस दौरान भी श्री प्रहलाद जानी ने किसी प्रकार का और जल ग्रहण नहीं किया। और ना ही उन्होंने इस दौरान मल-मूत्र का त्याग किया। जानकारियों को शोधकर्ताओं की टीम ने बताया था।


हालांकि अभी तक सरकार द्वारा पूरी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं की गई है।


शोधकर्ताओं का कहना है, 15 से 20 दिनों तक औसत वजन वाला इंसान इस प्रकार भूखा एवं प्यासा रहने पर मर सकता है। परंतु प्रहलाद जानी का शरीर सामान्य रूप से कार्य करता रहा।


सन 2006 में द डिस्कवरी चैनल ने उनके ऊपर एक वृत्तचित्र 2010 में इंडिपेंडेंट टेलिविजन नेटवर्क नहीं है। एक वीडियो इसी प्रकार ऑस्ट्रेलियाई चैनल, ईतावली चैनल इत्यादि टेलीविजन कार्यक्रम निर्माताओं ने समय-समय पर उनके बारे में जानकारी प्रधान करी है।


70 वर्षों तक, कोई इंसान बिना भोजन एवं पानी के जीवित रह सकता है ? सारे तथ्यों के आ जाने के बाद भी अविश्वसनीय सा महसूस होता है।





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