ज़ीरो की खोज आर्यभट्ट ने कलयुग में की तो रामायण में रावण के 10 शीश और द्वापर युग में 100 कौरवों की गिनती किसने की

दोस्तों, आजकल सोशल मीडिया का जमाना है, जो बहुत फास्ट और एडवांस है। सोशल मीडिया के 60% एक्टिव यूजर्स यंग जेनरेशन है। इनकी जिज्ञासा जितनी प्रबल है उतनी ही तेज हर प्रश्न का जवाब पा लेने की इच्छा है। कोई भी सामान्य या असामान्य प्रश्न दिमाग में उठते ही उत्तर प्राप्त करना बहुत जरूरी होता है, यदि सही और सटीक उत्तर ना मिले तो दिल को चैन नहीं मिलता। ऐसा ही एक सामान्य प्रश्न जो शून्य की खोज से जुड़ा है, सोशल प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लोग खूब धड़ल्ले से उठा रहे हैं, फेसबुक पर आपको सही जवाब मिले ना मिले पर व्यंग्य और कुतर्क खूब मिल जाएंगे।
असल में इस प्रश्न को उठाने के पीछे जिज्ञासा का भाव कम भारतीय संस्कृति और ग्रंथों पर तंज कसने की मंशा अधिक नजर आती है। क्योंकि आधुनिक बनने की होड़ में अपनी संस्कृति को नीचा दिखाकर खुद को मॉडर्न साबित करना काफी सरल है।



यदि शून्य की खोज आर्यभट्ट ने कलयुग में की तो रावण के दस सिर और सौ कौरवों की गिनती कलयुग से पहले कैसे हुई



यह प्रश्न एक जोक की तरह फेसबुक और वॉट्सएप पर काफी शेयर किया जा रहा है, जिसमें एक शिष्य अपने गणित के अध्यापक से पूछ लेता है कि "यदि शून्य की खोज आर्यभट्ट ने कलयुग में की तो प्राचीन समय में रावण के दस सर और सौ कौरवों की गिनती कैसे पता चली? और गुरु जी इस प्रश्न के उत्तर की तलाश में अब तक भटक रहे है।

वो गुरु जी जो उत्तर की तलाश में भटक रहे है उन्होंने शायद ठीक से प्रश्न को समझा नहीं, क्योंकि जवाब भी इसी प्रश्न में छुपा हुआ है। जानते हैं कैसे -

शून्य की "खोज" आर्यभट्ट ने कलयुग में की।

"खोज" और खोजा उसी को जाता है जो पहले से मौजूद हो। नई बनाई गई चीज को "आविष्कार" कहते हैं। आर्यभट्ट के जन्म से पहले भी शून्य मौजूद था और गिनती में प्रयोग भी किया जाता था लेकिन आर्यभट्ट ने पांचवीं शताब्दी में अपने शोध के बाद शून्य को एक रूप दिया। जिसे '0' ज़ीरो लिखा गया। अगर इतिहास में जाएंगे तो ऐसे बहुत से सबूत मूल जाएंगे जिससे ये तर्क पता चलता है तब दश, शत् और सहस्त्र जैसी संख्याएं प्रयोग की है। ठीक उसी प्रकार न्यूटन ने गृत्वकर्षण gravity की खोज की, लेकिन न्यूटन के खोजने से पहले भी ग्रैविटेशनल फोर्स मौजूद था जिसे रोजमर्रा के कामों में प्रयोग किया जाता था, न्यूटन ने इस बल को गुरुत्वाकर्षण का नाम दिया इसके सिद्धांत बताए और दुनिया के सामने लाए।

ये सिर्फ एक उदाहरण मात्र है, भारतीय शास्त्रों और ग्रंथों में ऐसे बहुत से तथ्य पहले से ही लिखे हुए हैं जिन्हें बुद्धिजीवी आज भी खोजने का प्रयास कर रहे है। बहुत से तथ्यों को खोज लिया गया है जैसे की ब्रह्माण्ड में नवग्रह है, बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है, मंगल लाल ग्रह है आदि बातें प्राचीन ग्रंथों में पहले से ही बताई गई हैं जिन्हें कलयुग में साबित भी कर दिया गया। सिर्फ गणित ही भी ज्योतिष हो या आयुर्वेद सभी का वैज्ञानिक आधार है, बस जरूरत उसे सही तरह से लिंक करके समझने की। भारतीय वैदिक इतिहास कितना उन्नत था यह बताने की जरूरत नहीं है, जरूरत है तो इस पर गर्व करने की। उम्मीद है कि आपको आर्टिकल पसंद आया होगा, धन्यवाद।

Post a Comment

Previous Post Next Post