हनुमान चालीसा की इन पंक्तियां का मंत्र की तरह करेंगे जप तो होगा लाभ ही लाभ

हनुमान चालीसा की इन पंक्तियां का मंत्र की तरह करेंगे जप तो होगा लाभ ही लाभ

धार्मिक ग्रंथों में लगभग हर देवी-देवता के मंत्र और स्तोत्र आदि दिए गए हैं, इसमें से हनुमन जी तो प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। मान्यता है इसके जप से जातक को सताने वाला हर प्रकार का भय दूर होता है। तो वहीं ये भी कहा जाता है कि जिस तरह श्री राम की आराधना करने वाले जातक पर पवनपुत्र बजरंगबली खुश होते हैं। ठीक उसी तरह बजंरगबली की आराधना करने से श्री राम प्रसन होते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी की चालीसा की की कुछ चौपाईयों को मंत्र जाप के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। अगर नहीं तो चलिए आपको बताते हैं कि पवनपुत्र की आराधना से उपयोग होने वाली हनुमान चालीसा का चौपाईयों के बारे में जिन्हें दिव्य मंत्र के रूप में देखा जाता है और इनके जाप से विभिन्न प्रकार की इच्छाएं पूर्ण होती हैं। 

हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा का बड़ा ही महत्व है। इस चालीसा को पढ़ते रहने से व्यक्ति के मन में साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम का संचार होता है। इसके कारण ही वह संसार पर विजय प्राप्त कर लेता है।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।

इस पंक्ति का जप उन बच्चों को करना चाहिए जिनका पढ़ाई में मन न लगता हो, कहा जाता इससे मन अच्छे से एकाग्र हो पाता है। 

भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे।

जिस जातक के मन में किसी प्रकार का भय होता है उसे उपरोक्त पंक्ति का उच्चाण करना चाहिए।  

भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे।

हर तरह के कार्य में आ रही बाधाओं को करने के लिए इस पंक्ति का पाठ करना चाहिए, इससे समस्त कार्य सिद्ध हो जाते हैं। 

नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत बीरा।

जो व्यक्ति एक लंबे समय से बीमार चल रहा हो उसे उस पंक्ति का जाप करना चाहिए।

संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। या

संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै

जिस व्यक्ति को अपने या परिवार के किसी सदस्य के प्राणों पर कोई संकट मंडराता नज़र आ रहा हो उसे उपरोक्त दोनों पंक्तियों में किसी एक का उच्चारण करना चाहिए। 

महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी

जिस घर का बच्चा किसी बुरी बुरी संगत में पड़ जाए तो ऐसे में ऊपर दी गई पंक्ति का श्रद्घा विश्वास से जप करें। 

जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बन्दि महा सुख होई।

किसी भी तरह के बंधन से मुक्ति पाने के लिए इस पंक्ति को जपें। 

सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना।

जिस जातक को ये डर साता रहा हो तो उसके जीवन को खत्म करने का डर हो तो उपरोक्त पंक्ति का जप करें। 

और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै।

मन की किसी इच्छा को पूरा करने के लिए ऊपर दी गई पंक्ति का उच्चारण करें। 

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