जिस घर में होते हैं ये दोष, वे बन जाता है भूत बंगला

जिस घर में होते हैं ये दोष, वे बन जाता है भूत बंगला

 जिस जन्म पत्रिका के चतुर्थ भाव स्थान में राहू-मंगल, राहू-शनि की ग्रह युति है तो मकान में रहने के कारण वास्तु दोष आ जाता है। जिस जातक की जन्मकुंडली में मंगल-राहू की स्थिति किसी भी भाव स्थान में इकट्ठी हो, ऐसे जातक का दूषित जगह में रहने का पक्का मजबूत योग बनता है।

ऐसी कुंडली का जातक जिस मकान में रहेगा, वह मकान अवश्य ही बाधाग्रस्त होगा तथा उस मकान की रचना ऐसी होगी जिसमें दक्षिण-पश्चिम एवं नैर्ऋत्य दिशा से आने वाली किरणों का संगम अवश्य होगा। किसी न किसी रूप में ही सही, इन दिशाओं से आने वाली किरणों का संगम ही कुंडली में मंगल-राहू की युति है।

ऐसे मकान में रहने वालों को हमेशा अकस्मात एक्सीडैंट का भय रहेगा। ऐसा जातक सुख-शांति से वंचित रहेगा, इसलिए मकान की रचना ऐसी होनी चाहिए जिसमें दक्षिण एवं नैर्ऋत्य कोण से आने वाली प्रकाश की किरणों का संयोग न हो। वास्तुदोष से युक्त मकान को ही भूत बंगला (डोम स्थान) कहा जाता है। अत: वास्तुदोष को दूर करने के लिए वास्तु पुरुष की पूजा करें।

स्वर्ण, अलंकार एवं नकदी रोकड़ रखने के लिए ईशान की दिशा सर्वश्रेष्ठ एवं सम्पत्तिवर्धक है। ईशान कोण के अलावा अन्य किसी और दिशा में स्वर्ण, अलंकार एवं रोकड़ रखने की जगह नहीं होनी चाहिए।

पूर्व दिशा में शौचालय बिल्कुल नहीं होना चाहिए क्योंकि सुबह में पूर्व की दिशा से आने वाला सूर्य का प्रकाश, जिसमें विटामिन-डी एवं एफ. की मात्रा सबसे अधिक होती है और जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है, उस शौच पर गिरकर अशुद्ध जीवाणुओं, कीटाणुओं एवं रोगाणुओं से युक्त होकर हानिकारक हो जाता है। यहां तक अनुभव में आया है कि पूर्व की दिशा में शौचालय होने से उस मकान में रहने वालों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहती। यहां तक कि जिस मकान के प्रवेश द्वार पर शौचालय है, बेशक गृह प्रवेश किसी भी दिशा में हो, ऐसे मकान में रहने वालों की आर्थिक स्थिति दयनीय होती है।

प्रवेश द्वार के आस-पास बाहरी हिस्से में ड्रेनेज लाइन के नल (गंदे पानी के निकास वाले पाइप) नहीं होने चाहिए। ऐसे मकान में रहने वालों को भयानक कष्ट एवं दारुण दुखों का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातक सुख-समाधान से हमेशा वंचित रहते हैं। गृहस्थी में प्रतिदिन कोई-न-कोई समस्या सामने आती ही रहती है।



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