पूजा सामग्री के धोखे में बहा दी ऐसी अनमोल चीज, मालूम पड़ने पर खिसक गई पैरों तले जमीन

पूजा सामग्री के धोखे में बहा दी ऐसी अनमोल चीज, मालूम पड़ने पर खिसक गई पैरों तले जमीन

पूजा के बाद बचे हुए पूजन सामग्री को ज्यादा दिनों तक घर में रखना शुभ नहीं माना जाता है, इसलिए लोग इसे नदी या नहर में प्रवाहित कर देते हैं। लेकिन एक ऐसा परिवार है जिसे पूजन सामग्री नदी में प्रवाहित करना इतना महंगा पड़ गया कि अब सभी के होश उड़े हुए हैं। घर के सभी सदस्य उस वक्त को कोस रहें हैं, जब उन्होंने पूजा- सामग्री को नदी में प्रवाहित किया। अब ये लोग बस यही सोच रहे हैं कि आखिरकार उनसे इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई।

दरअसल ये मामला है पंजाब के संगरूर का। जहां एक परिवार को नहर में पूजा सामग्री प्रवाहित करना खासा महंगा पड़ गया है। कार में सवार परिवार को एक लिफाफे में पड़े पूजन सामग्री को नदी में प्रवाहित करना था, इन्होंने चलती कार से लिफाफा नहर में फेंक तो दिया, लेकिन जब घर पहुंचे तो उनके पैरो तले जमीन खिसक गई। दरअसल, इस परिवार ने पूजा सामग्री की जगह सोने-चांदी के गहनों वाला लिफाफा ही नहर में फेंक दिया। कार में दो लिफाफे पड़े थे। एक में पूजा सामग्री यानी कि धूप और अगरबत्ती की राख पड़ी थी, जबकि दूसरे लिफाफे में गहने थे। उन्होंने जो लिफाफा नहर में प्रवाहित किया वह गहनों से भरा था। लिफाफे में करीब दस तोले सोना व आधा किलो चांदी के जेवर थे।

हुआ यूं कि लखवीर चंद का परिवार किसी समारोह में जा रहा था। सोचा, कि चलो रास्ते में पड़ती नहर में पूजा सामग्री भी प्रवाहित कर देंगे। सारा सामान लिफाफे में डालकर ही उन्होंने दूसरे सामान के साथ ही गाड़ी में रख लिया। गाड़ी भवानीगढ़ के नदामपुर बाइपास पर पड़ती नहर पर रूकी। जहां उन्होंने कार में से लिफाफा निकाला और नहर में फेंक दिया। इतना ही नहीं उनको अपनी गलती का एहसास तब हुआ जब वो घर पहुंच गए। देखा तो राख वाला लिफाफा गाड़ी में ही पड़ा हुआ था, और सोने- चांदी वाला लिफाफा वहां मौजूद नहीं था। उन्हें एहसास हो गया कि उन्होंने जो लिफाफा नहर में प्रवाहित किया, वो गहनों वाला ही था। फिर क्या घर में मातम का माहौल छा गया।

जैसे ही वो ये बात समझे कि गहनों वाला लिफाफा नहर में प्रवाहित हो गया है, उलटे पांव परिवार नहर पर पहुंचा। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस वालों को भी दी। साथ ही गोताखोरों की मदद से नहर में गहने ढूंढने की भी कोशिश की गई, लेकिन निराशा के अलावे कुछ भी हाथ नहीं लगा। क्योंकि जो होना था वो हो चुका था।

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