जो समझते हैं महाभारत को झूठ, वो देख लें महाभारत को सच साबित करने वाले 9 सबूत

महाभारत सच है या झूठ यह उलझन अक्सर लोगों के बीच रहती है, लेकिन आज हम मिले पुरातात्विक और विज्ञानिक सबूतों के आधार पर साबित कर देंगे कि महाभारत सच है, तो चलिए फिर जान लेते हैं महाभारत से जुड़े इन 9 सबूतों को| १.खगोल शास्त्र खगोल शास्त्र के अनुसार महाभारत के युद्ध से ठीक पहले भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर गए थे, जब चंद्रमा रेवती के नक्षत्र में था, भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर जाते समय रास्ते में एक जगह रुके थे, जहां पर उन्होंने विश्राम किया था, जिस जगह का नाम वृक्षथला है और उस दिन चंद्रमा बहरानी नक्षत्र मैं था, उस समय की घटना की डेट तक का पता लगा चुके हैं|  २.कुरुक्षेत्र कुरुक्षेत्र में होने वाली तबाही और पुरातात्विक विशेषज्ञों के अनुसार वहां की जमीन लाल पाई गई और वहां पर लोहे से बने तीर और भालो को जमीन में गड़ा पाया गया, जिनकी जांच पड़ताल करने के बाद उन्हें 2800 ईसवी पूर्व का बताया गया, जो कि महाभारत के समय काल का है, आपको बता दें यह जगह हरियाणा राज्य में स्थित है|  ३.आज के न्यूक्लियर हथियार महाभारत काल में ब्रह्मास्त्र का उपयोग किया जाता था, जो भयानक तबाही लाने के लिए कुछ जाने माने लोगों के पास था, यह अस्त्र धर्म और सत्य को बनाए रखने के लिए ब्रह्मा द्वारा बनाया गया एक बहुत ही विनाशकारी परमाणु हथियार था, यह हथियार अचूक और भयंकर अस्त्र होता था,  इस हथियार को दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही रोका जा सकता था और रामायण में भी लक्ष्मण जब मेघनाथ पर ब्रह्मास्त्र से प्रहार करना चाहा रहे थे तो भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण को यह कहकर रोक दिया था कि अभी इस का समय नहीं है, क्योंकि यह सारी लंका को तबाह कर देगा, हिमाचली खबर जिसकी वजह से बेकसूर लोगों की जान जा सकती है, यह हथियार रामायण में लक्ष्मण और विभीषण के पास था और महाभारत में यह द्रोणाचार्य, कृष्ण, अश्वत्थामा, प्रद्युमन, करण, अर्जुन और युधिष्ठिर के पास था, आज के वर्तमान समय में जिन आधुनिक टेक्निक का उपयोग किया जा रहा है वह महाभारत काल की है, जिन में कई प्रकार के परमाणु बम मौजूद है, जो पूरे संसार को तबाह कर देने की क्षमता रखते हैं|  ४.महाभारत के छंदों में लिखा गया महाभारत काल्पनिक है यह कहना असत्य है, क्योंकि महाभारत में कई प्रकार के छंद लिखे गए हैं जिन्हें पढने पर वह एक कविता जैसे लगते हैं, उस समय किसी भी चीज को कविता की तरह लिखा जा ता था, यंहा तक की गणित के फार्मूले को भी कविता की तरह लिखा गया था|  ५.अंगद का प्रमाण कुंती के सबसे बड़े बेटे दानवीर कर्ण अंगद के राजा थे, जो दुर्योधन द्वारा उपहार स्वरूप भेंट किया गया था, आज के समय में उत्तर प्रदेश मैं गोंडा जिले के नाम से जाना जाता है, जरासंध द्वारा अपने राज्य के कुछ हिस्सों को करण को दिए जाने की बात भी कहीं जाती है, जो आज बिहार के मूंगेर और भागलपुर जिले के नाम से प्रसिद्ध है, आज के समय हम जिसे दिल्ली मानते हैं वह महाभारत काल में इंद्रप्रस्थ के नाम से जानी जाती थी और यह स्थान कोई काल्पनिक नहीं है, लेकिन कुछ जगह आज भी ऐसी मौजूद है जिनका नाम महाभारत काल में भी था और आज के समय भी है जैसे कि द्वारिका, बरनावा, कुरुक्षेत्र आदि|   ६.चक्रव्यू पत्थर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में सोलह सिंगी धार के नीचे बसा एक गांव मौजूद है जिसे राजनौण गांव के रूप में माना जाता है, मान्यताओं के अनुसार पांडव अज्ञातवास के दौरान यहां रुके थे और चक्रव्यूह का ज्ञान प्राप्त करने के लिए पत्थर पर चक्रव्यू का नक्शा उकेरा था, जो कि आज भी मौजूद है, इस पत्थर पर मौजूद चक्रव्यू में अंदर जाने का रास्ता मौजूद है लेकिन बाहर निकलने का नहीं|  ७.लाक्षागृह महाभारत काल में लाक्षागृह की महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई है, क्योंकि कौरवों ने पांडवों के लिए लाक्षागृह बनवाया था, जिसमें उन्हें जलाने की साजिश रची गई थी, लेकिन सुरंग के माध्यम से पांडव निकल कर बाहर आ गए थे, आज भी वह सुरंग बरनावा नामक स्थान पर मौजूद है|     ८.द्वारिका नगरी भगवान श्री कृष्ण द्वारिका के राजा थे और इस बात का उल्लेख महाभारत में मिलता है, यह नगरी जलमग्न हो गई थी और यह स्थान गुजरात के पास समुंदर के नीचे एक पुराना शहर के रूप में मिला है, इसके प्रमाण से पता चलता है कि यह वही द्वारका नगरी है जिसका उल्लेख महाभारत में किया गया है, इस बात से साबित होता है कि द्वारका कोई काल्पनिक शहर नहीं बल्कि वास्तविक शहर है|     ९.विशाल राजवंश महाभारत का वंश राजवंश राजा मनु से शुरू होता है और इस ग्रंथ में 50 से अधिक वंशो का वर्णन है, पांडु धृतराष्ट्र भी इस वंश के थे, यदि महाभारत एक कथा होती तो लेख में सिर्फ 5 या 10 राजवंश का वर्णन मिलता, जबकि 50 से अधिक राजवंश का वर्णन किया गया है, इसलिए यह कोई काल्पनिक नहीं| कैसी लगी आपको हमारी यह जानकारी आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस पोस्ट को लाइक शेयर करें|


महाभारत सच है या झूठ यह उलझन अक्सर लोगों के बीच रहती है, लेकिन आज हम मिले पुरातात्विक और विज्ञानिक सबूतों के आधार पर साबित कर देंगे कि महाभारत सच है, तो चलिए फिर जान लेते हैं महाभारत से जुड़े इन 9 सबूतों को|

१.खगोल शास्त्र
खगोल शास्त्र के अनुसार महाभारत के युद्ध से ठीक पहले भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर गए थे, जब चंद्रमा रेवती के नक्षत्र में था, भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर जाते समय रास्ते में एक जगह रुके थे, जहां पर उन्होंने विश्राम किया था, जिस जगह का नाम वृक्षथला है और उस दिन चंद्रमा बहरानी नक्षत्र मैं था, उस समय की घटना की डेट तक का पता लगा चुके हैं|

२.कुरुक्षेत्र

कुरुक्षेत्र में होने वाली तबाही और पुरातात्विक विशेषज्ञों के अनुसार वहां की जमीन लाल पाई गई और वहां पर लोहे से बने तीर और भालो को जमीन में गड़ा पाया गया, जिनकी जांच पड़ताल करने के बाद उन्हें 2800 ईसवी पूर्व का बताया गया, जो कि महाभारत के समय काल का है, आपको बता दें यह जगह हरियाणा राज्य में स्थित है|

३.आज के न्यूक्लियर हथियार
महाभारत काल में ब्रह्मास्त्र का उपयोग किया जाता था, जो भयानक तबाही लाने के लिए कुछ जाने माने लोगों के पास था, यह अस्त्र धर्म और सत्य को बनाए रखने के लिए ब्रह्मा द्वारा बनाया गया एक बहुत ही विनाशकारी परमाणु हथियार था, यह हथियार अचूक और भयंकर अस्त्र होता था,

इस हथियार को दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही रोका जा सकता था और रामायण में भी लक्ष्मण जब मेघनाथ पर ब्रह्मास्त्र से प्रहार करना चाहा रहे थे तो भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण को यह कहकर रोक दिया था कि अभी इस का समय नहीं है, क्योंकि यह सारी लंका को तबाह कर देगा, हिमाचली खबर जिसकी वजह से बेकसूर लोगों की जान जा सकती है, यह हथियार रामायण में लक्ष्मण और विभीषण के पास था और महाभारत में यह द्रोणाचार्य, कृष्ण, अश्वत्थामा, प्रद्युमन, करण, अर्जुन और युधिष्ठिर के पास था, आज के वर्तमान समय में जिन आधुनिक टेक्निक का उपयोग किया जा रहा है वह महाभारत काल की है, जिन में कई प्रकार के परमाणु बम मौजूद है, जो पूरे संसार को तबाह कर देने की क्षमता रखते हैं|

४.महाभारत के छंदों में लिखा गया
महाभारत काल्पनिक है यह कहना असत्य है, क्योंकि महाभारत में कई प्रकार के छंद लिखे गए हैं जिन्हें पढने पर वह एक कविता जैसे लगते हैं, उस समय किसी भी चीज को कविता की तरह लिखा जा ता था, यंहा तक की गणित के फार्मूले को भी कविता की तरह लिखा गया था|

५.अंगद का प्रमाण
कुंती के सबसे बड़े बेटे दानवीर कर्ण अंगद के राजा थे, जो दुर्योधन द्वारा उपहार स्वरूप भेंट किया गया था, आज के समय में उत्तर प्रदेश मैं गोंडा जिले के नाम से जाना जाता है, जरासंध द्वारा अपने राज्य के कुछ हिस्सों को करण को दिए जाने की बात भी कहीं जाती है, जो आज बिहार के मूंगेर और भागलपुर जिले के नाम से प्रसिद्ध है, आज के समय हम जिसे दिल्ली मानते हैं वह महाभारत काल में इंद्रप्रस्थ के नाम से जानी जाती थी और यह स्थान कोई काल्पनिक नहीं है, लेकिन कुछ जगह आज भी ऐसी मौजूद है जिनका नाम महाभारत काल में भी था और आज के समय भी है जैसे कि द्वारिका, बरनावा, कुरुक्षेत्र आदि|

६.चक्रव्यू पत्थर
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में सोलह सिंगी धार के नीचे बसा एक गांव मौजूद है जिसे राजनौण गांव के रूप में माना जाता है, मान्यताओं के अनुसार पांडव अज्ञातवास के दौरान यहां रुके थे और चक्रव्यूह का ज्ञान प्राप्त करने के लिए पत्थर पर चक्रव्यू का नक्शा उकेरा था, जो कि आज भी मौजूद है, इस पत्थर पर मौजूद चक्रव्यू में अंदर जाने का रास्ता मौजूद है लेकिन बाहर निकलने का नहीं|

७.लाक्षागृह
महाभारत काल में लाक्षागृह की महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई है, क्योंकि कौरवों ने पांडवों के लिए लाक्षागृह बनवाया था, जिसमें उन्हें जलाने की साजिश रची गई थी, लेकिन सुरंग के माध्यम से पांडव निकल कर बाहर आ गए थे, आज भी वह सुरंग बरनावा नामक स्थान पर मौजूद है|



८.द्वारिका नगरी
भगवान श्री कृष्ण द्वारिका के राजा थे और इस बात का उल्लेख महाभारत में मिलता है, यह नगरी जलमग्न हो गई थी और यह स्थान गुजरात के पास समुंदर के नीचे एक पुराना शहर के रूप में मिला है, इसके प्रमाण से पता चलता है कि यह वही द्वारका नगरी है जिसका उल्लेख महाभारत में किया गया है, इस बात से साबित होता है कि द्वारका कोई काल्पनिक शहर नहीं बल्कि वास्तविक शहर है|



९.विशाल राजवंश
महाभारत का वंश राजवंश राजा मनु से शुरू होता है और इस ग्रंथ में 50 से अधिक वंशो का वर्णन है, पांडु धृतराष्ट्र भी इस वंश के थे, यदि महाभारत एक कथा होती तो लेख में सिर्फ 5 या 10 राजवंश का वर्णन मिलता, जबकि 50 से अधिक राजवंश का वर्णन किया गया है, इसलिए यह कोई काल्पनिक नहीं|

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