वंशानुगत हो सकती है अल्ज़ाइमर की बामारी, जानिए क्या हैं इसके लक्षण और देखभाल का तरीका

वंशानुगत हो सकती है अल्ज़ाइमर की बामारी, जानिए क्या हैं इसके लक्षण और देखभाल का तरीका

अल्जाइमर मस्तिष्क से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें आदमी के सोचने समझने और चीजों को याद रखने की क्षमता काफी हद तक प्रभावित होती है. यह बीमारी इतनी गंभीर हो सकती है कि आदमी की दैनिक क्रियाएं भी इसके चलते प्रभावित होती हैं. डॉ. नबी वली बताते हैं कि यह तेजी से फैलने और याददाश्त को हानि पहुंचाने वाली बीमारी है.

इसकी वजह से न सिर्फ रोगी का जीवन प्रभावित होता है, बल्कि उसके परिवार के सभी सदस्य परेशान हो जाते हैं. अल्जाइमर की बीमारी क्यों होती है, इस पर काफी शोध किया जा रहा हैं. कहा जा रहा है कि यह रोग वंशानुगत भी हो सकता है. आइए जानते हैं इसके लक्षणों और उपचार के बारे में...

बहुत धीरे-धीरे पता चलते हैं अल्जाइमर के लक्षण

अल्जाइमर के लक्षण धीरे-धीरे पता चलते हैं और कुछ समय बीतने के बाद इनमें परिवर्तन हो सकता है. कोई भी व्यक्ति इस बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित नहीं कर सकता है. हालांकि कुछ उपचार द्वारा ठीक होने में मदद मिल सकती है, लेकिन इस रोग से हमेशा के लिए मुक्ति नहीं मिल सकती.

अल्जाइमर के लक्षणों में स्मरण शक्ति कम होना, जिसमें हाल ही की घटनाओं के बारे में याद न होना, समय और स्थान के बारे में भूल जाना, नई जानकारियां याद रखने में कठिनाई होना और वाहन चलाने, दवा लेने, खाना पकाने, कपड़े पहनने और नहाने जैसे काम कर पाने में काफी कठिनाई हो सकती है. अल्जाइमर के रोगी को किसी व्यक्ति को पहचानने में भी दिक्कत हो सकती है.

अल्जाइमर की जांच कैसे कराएं ?

अल्जाइमर के रोगियों की जांच के लिए सिटी स्कैन, एमआरआई या पीईटी स्कैन जैसे परीक्षण करवाएं जा सकते हैं. याददाश्त कम होने के पैटर्न और परिवर्तनों के प्रति मरीज में कितनी जागरूकता रहती है, इस बारे में भी अवलोकन किया जाता है. डॉक्टर कुछ सामान्य प्रश्न पूछकर भी रोगी की मानसिक दशा जानने की भी कोशिश करते हैं. कुछ सामान्य मेडिकल टेस्ट भी कराए जाते हैं.

65 की उम्र के बाद ज्यादा होता है अल्जाइमर का खतरा

विशेषज्ञ का कहना है कि अल्जाइमर रोग ज्यादातर 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखा जाता है. यह रोग आनुवंशिक होता है, लेकिन यदि किसी दुर्घटना में मस्तिष्क में चोट लगी हो तो यह भी अल्जाइमर का कारण हो सकता है. ज्यादा धूम्रपान करने वाले, उच्च रक्तचाप, हाई कोल्स्ट्रॉल और मधुमेह के रोगियों में भी अल्जाइमर होने का खतरा होता है.

अल्जाइमर का उपचार

अल्जाइमर के सही कारणों को पता लगाने के लिए कई शोध किए जा रहे हैं. वैसे तो अल्जाइमर ठीक होना बहुत मुश्किल है, लेकिन फिर भी अल्जाइमर के उपचार के लिए आजकल कई थैरेपी और फार्माकोलॉजिक ट्रीटमेंट दिए जा रहे हैं, जिससे अल्जाइमर के रोगी के मस्तिष्क की कोशिकाओं को खत्म होने से बचाया जा सके. डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, खानपान पर ध्यान देकर भी अल्जाइमर के खतरे को कम किया जा सकता है.

इनमें शामिल हैं- हरी पत्तेदार सब्जियां, हरी चाय, दाल चीनी, सैल्मन मछली, हल्दी. साथ ही नारियल और जैतून के तेल का इस्तेमाल भी करना चाहिए. इसके अतिरिक्त अल्जाइमर के रोगी की सही देखभाल के द्वारा भी उनका उपचार किया जा सकता है. इन रोगियों को किसी न किसी गतिविधियों में भागीदारी भी दिलाना चाहिए, जिससे उनकी मनोदशा में सुधार हो सके. हर परेशानी में उनकी मदद करना चाहिए ताकि वे स्वयं को अकेला महसूस न करें.

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