छोटे-छोटे आइटम के लिए भी चीन पर निर्भर नहीं रहेगा भारत, देश में ही निर्माण की हो रही तैयारी

छोटे-छोटे आइटम के लिए भी चीन पर निर्भर नहीं रहेगा भारत, देश में ही निर्माण की हो रही तैयारी

चीन से आने वाले छोटे-छोटे आइटम को अब भारत में ही बनाने की तैयारी की जा रही है। इस काम में एमएसएमई मंत्रालय की मदद ली जाएगी। उद्यमियों का भी मानना है कि इस प्रकार की पहल से चीन से आयात में कमी आने के साथ कई ऐसे आइटम का उत्पादन भारत में शुरू हो जाएगा जिसे अब तक भारत में नहीं बनाया जाता है। मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक भारत चीन से 8,000 से अधिक आइटम का आयात करता है।

मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक चीन से आने वाले कई ऐसे आइटम है जिसका निर्माण भारत में आसानी से किया जा सकता है, लेकिन चीन से आसानी से उपलब्ध होने की वजह से उन आइटम के निर्माण की दिशा में देश के उद्यमियों की तरफ से कोशिश नहीं की गई।

कॉस्मेटिक उत्पाद के मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़े उद्यमियों ने बताया कि लिपस्टिक और सिंदूर के साथ एक बहुत ही छोटा ब्रश जैसे आइटम लगाए जाते हैं ताकि उसके इस्तेमाल में महिलाओं को आसानी हो सके। इस एक ब्रश की कीमत 10-15 पैसे होती है। वैसे ही, महिलाएं आई-लाइनर लगाने के लिए जिस ब्रश का इस्तेमाल करती है, वह भी चीन से ही आता है।चीन से मंगाने में इसकी कीमत 28-30 पैसे आती है। ये ब्रश भारत में नहीं बनते हैं और भारत के कास्मेटिक मैन्यूफैक्चरर्स इस प्रकार के ब्रश को मंगाने के लिए हर साल करोड़ों रुपए चीन को दे देते हैं।

उद्यमियों ने बताया कि सेनिटाइजर रखने में इस्तेमाल होने वाले ट्रिगर पंप तक चीन से आ रहे हैं। उद्यमियों ने बताया कि चीन में 7 रुपए में बिकने वाले ट्रिगर पंप को चीन भारत में 30 रुपए में भेज रहा है। उद्यमियों के मुताबिक कई ऐसे केमिकल है जिसका उत्पादन भारत में होता ही नहीं है जबकि उनके बिना कास्मेटिक के कई आइटम को बनाना संभव ही नहीं है।

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