मनी लॉन्ड्रिंग केस में अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत से आज ईडी करेगी पूछताछ



मनी लॉन्ड्रिंग केस में 29 जुलाई को ईडी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत से पूछताछ करने वाली है।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने कथित उर्वरक घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में पिछले हफ्ते अशोक गहलोत के भाई के परिसरों में भी छापे मारे थे।

अग्रसेन गहलोत बीज और उर्वरक कंपनी अनुपम कृषि के प्रमोटर हैं। ईडी ने 2007-09 के सीमा शुल्क विभाग के किसानों को रियायती म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) देने में कथित अनियमितताओं के मामले में आपराधिक प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दाखिल की थी। इस मामले की जांच 2013 में पूरी हुई थी। कहा जाता है कि धोखाधड़ी कर यह मामला करीब 60 करोड़ रुपए का है। सूत्रों का कहना है कि अग्रसेन गहलोत और उनकी कंपनी कथित उर्वरक मामले में सात करोड़ रुपए के सीमा शुल्क जुर्माने का सामना कर रही है।

गहलोत सरकार 31 जुलाई से ही चाहती है विधानसभा सत्र

राजस्थान सरकार ने विधानसभा का सत्र 31 जुलाई से आहूत करने के लिए संशोधित प्रस्ताव राज्यपाल कलराज मिश्र को भेजा। मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधित प्रस्ताव पर विचार- विमर्श के बाद इसे राजभवन भेजा गया है। राजभवन के सूत्रों के अनुसार फाइल राजभवन पहुंच गयी है।

सूत्रों के अनुसार सरकार ने अपने संशोधित प्रस्ताव में भी यह उल्लेख नहीं किया है कि वह विधानसभा सत्र में विश्वासमत हासिल करना चाहती है या नहीं। हालांकि, इसमें 31 जुलाई से सत्र आहूत करने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार ने तीसरी बार यह प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। इससे पहले दो बार राजभवन कुछ बिंदुओं के साथ प्रस्ताव सरकार को लौटा चुका है।

वहीं, राजभवन के सूत्रों ने मंगलवार रात बताया कि राज्य सरकार की ओर से भेजी गयी पत्रावली राजभवन सचिवालय को मिल गयी है। इससे पहले राजस्थान मंत्रिमंडल की बैठक मंगलवार को यहां हुई जिसमें विधानसभा सत्र बुलाने के संशोधित प्रस्ताव पर राज्यपाल द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर चर्चा की गयी। बैठक के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि सरकार 31 जुलाई से सत्र चाहती है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ”हम 31 जुलाई से सत्र चाहते हैं। जो पहले प्रस्ताव था, वह हमारा अधिकार है, कानूनी अधिकार है। उसी को हम वापस भेज रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब अगर आप यदि तानाशही पर आ जाएं, आप अगर तय कर लें कि हम जो संविधान में तय है, उसे मानेंगे ही नहीं तो देश ऐसे चलेगा क्या?’’

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