लॉकडाउन में इन बातों को न करें अनदेखा, हो सकते हैं डिप्रेशन का शिकार

लॉकडाउन में इन बातों को न करें अनदेखा, हो सकते हैं डिप्रेशन का शिकार

कोरोना महामारी और लॉकडाउन  के बीच शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसको किसी भी तरह की चिंता नहीं होगी. अगर आदमी किसी न किसी बात को लेकर परेशान है. ऐसे में थोड़ा−बहुत तनाव  होना आम है. लेकिन जब यही तनाव बढ़ने लगता है तो एक गंभीर बीमारी बन जाता है, जिसे अवसाद या डिप्रेशन भी कहते हैं.

व्यक्ति कई बार लापरवाही या किन्ही और कारणों से इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देता है, जिसके चलते स्थिति काफी गंभीर हो जाती है. अवसाद ज्यादा बढ़ने पर जान जाने तक का खतरा होता है. व्यक्ति इतनी निराश हो जाता है कि वह खुद को नुकसान पहुंचाने लगता है. ऐसे में उसकी जान भी जा सकती है. इसलिए जरूरी है कि आप समय रहते अवसाद के लक्षणों को पहचा लें. तो चलिए इसके लक्षणों के बारे में जानते हैं...

1.इस तरह के होते हैं बदलाव

किसी भी अवसादग्रस्त व्यक्ति में कई रह के बदलाव होते हैं. इनमें शारीरिक, मानसिक और व्यावहारिक स्तर पर बदलाव शामिल हैं. इन्हीं बदलावों के आधार पर जाना जा सकता है कि सामने वाला व्यक्ति के अवसादग्रस्त है. साथ ही इसी से पता चलता है कि व्यक्ति की स्थिति कितनी खराब है. हालांकि यह लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं.

2. उदास रहना

अवसादग्रस्त व्यक्ति अक्सर उदास और निराश रहता है. साथ ही वह किसी बात को लेकर चिंतित दिखाई देता है. ऐसे व्यक्ति की बातों में किसी भी प्रकार की जीवंतता या उत्साह नहीं दिखता. कुछ लोग तो स्वभाव से बेहद चिड़चिडे़ हो जाते हैं. वो लोग साधारण बातों पर परेशान और बेचैन हो जाते हैं. वह किसी से बात करने या किसी के साथ भी इन्लॉन्व होने में कोई रुचि नहीं रखते. ऐसे लोग अकेले रहने लगते हैं.

3. असफलता भी है कारण

व्यक्ति की असफलता भी उसको अवसाद के रास्ते पर धकेल सकती है. ऐसे व्यक्ति अपनी असफलता के लिए खुद को ही दोषी मानते हैं. या फिर असफल होने पर खुद को बेहद असहाय और बेकार समझने लगते हैं. ऐसे लोग अपनी असफलताओं के बारे में सोचकर दुखी रहते हैं. कभी−कभी तो वह इस हद तक नकारात्मक हो जाते हैं कि उन्हें लगता है कि अब उनके जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं होने वाला है. ऐसे में वह गलत कदम उठा सकते हैं.

4. गतिविधियों में रुचि न लेना

अवसाद के शिकार व्यक्तियों में उर्जा का स्तर न के बराबर होता है. वह किसी भी तरह की गतिविधि में भाग लेना पसंद नहीं करते और वो अकेले या कोने में अपनी जगह बना लेते हैं. ऐसे लोग रोजमर्रा के काम भी ठीक ढंग से नहीं कर पाते. उनका रुटीन भी बदलने लगता है.

5. खुद को एकाग्र नहीं कर पाना

अवसादग्रस्त व्यक्ति हमेशा ही मन में कुछ न कुछ नकारात्मक सोचता रहता है, जिसकी वजह से वह खुद को किसी भी काम में एकाग्र नहीं कर पाता.जब लोग कोई बात कहते हैं तो उसे वह ठीक से उसे नहीं पाता और दिमाग में भी नहीं बैठा पाता. ऐसे आदमी का किताब पढ़ना और टीवी देखना भी मुश्किल हो जाता है.

हमारे द्वारा बताए गये कोई भी लक्षण आपको खुद में या अपने परिवार के किसी सदस्य के अंदर देखने तो मिलते हैं तो आपको समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. देरी होने पर इसके घातक परिणाम हो सकते हैं.

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