दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम को चुनौती, दिल्ली सरकार को नोटिस

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम को चुनौती, दिल्ली सरकार को नोटिस

नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम को चुनौती देने और आयोग के अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने 31 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील धनंजय जैन ने कहा कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रिटायर हो चुके हैं। अल्यपसंख्यक आयोग अधिनियम गैरकानूनी होने के बावजूद दिल्ली सरकार ने आयोग के नए अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने अल्पसंख्यक आयोग के नए अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।

यह याचिका विक्रम गहलोत ने दायर की है। पहले की याचिका में उन्होंने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम को चुनौती देते हुए मांग की थी कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष जफरुल इस्लाम को उनके पद से हटाया जाए। सुनवाई के दौरान कहा गया था कि दिल्ली विधानसभा को दिल्ली अल्पसंख्यक अधिनियम को पारित करने का अधिकार नहीं है, इसलिए इस अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर इसे निरस्त किया जाए। याचिका में कहा गया है कि जब अधिनियम ही असंवैधानिक है तो इसके जरिये हुई नियुक्तियां भी अवैध हैं। यहां तक कि अल्पसंख्यक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष जफरुल इस्लाम की नियुक्ति भी अवैध है।

वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई के दौरान 11 मई को हाई कोर्ट को ये सूचित किया गया था कि दिल्ली के उप-राज्यपाल ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के जफरुल इस्लाम को नोटिस जारी कर पूछा था कि उन्हें क्यों न आयोग के पद से हटा दिया जाए। अलख आलोक श्रीवास्तव की याचिका में कहा गया था कि जफरुल इस्लाम ने भारत को नीचा दिखाने वाला बयान दिया है। जफरुल इस्लाम के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है लेकिन दिल्ली सरकार कार्रवाई नहीं कर रही।

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