सचिन पायलट पर फैसला लेने से पहले 3 घंटे तक राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी में क्या मंथन हुआ, जानिए मामला

सचिन पायलट पर फैसला लेने से पहले 3 घंटे तक राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी में क्या मंथन हुआ, जानिए मामला

मंगलवार को सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री के पद से हटाने का फ़ैसला लेने से पहले 3 घंटे तक राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी ने गहन मंथन किया था.

सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी शुरू में इस फ़ैसले के पक्ष में नहीं थे लेकिन उन्होंने इस फ़ैसले पर अपनी सहमति उस समय दी, जब प्रियंका ने सचिन पायलट से लगभग 25 मिनट तक हुयी चर्चा का ब्योरा दिया। पार्टी सूत्र बताते हैं कि प्रियंका ने सचिन की बातों को सुनने के बाद सचिन को प्रस्ताव दिया कि वह राजस्थान छोड़ कर राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करें जिसके जबाब में सचिन की शर्त थी कि पहले अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाये और उनको मुख्यमंत्री बनाया जाये ,चूँकि यह संभव नहीं था,क्योंकि सोनिया गाँधी ऐसा करने को तैयार नहीं थी.

अतः प्रियंका ने गहलोत के साथ विधायकों के समर्थन होने की बात की दलील दी जिसे सचिन ने सिरे से खारिज करते हुये प्रियंका को साफ़ कर दिया कि वह राष्ट्रीय राजनीति में नहीं आयेंगे क्योंकि राजस्थान उनकी और उनके पिता राजेश पायलट व माता रमा पायलट की कर्मभूमि है। सचिन के तेवरों को भांप कर प्रियंका ने राहुल और सोनिया से चर्चा करने का भरोसा सचिन को दिया और 10 जनपथ जा पहुँचीं।

उल्लेखनीय है कि सोनिया पहले से ही इस बात से नाराज़ थीं कि सचिन भाजपा के साथ मिलकर कांग्रेस सरकार को गिराने में जुटे हैं, इसकी जानकारी अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल पहले ही सोनिया को दे चुके थे।

प्रियंका के प्रस्ताव को सचिन द्वारा ठुकराने ,भाजपा से सांठ -गांठ करने जैसे बिंदुओं का संज्ञान लेकर परिवार के तीनों सदस्य इस नतीजे पर पहुंचे और उसकी जानकारी वेणुगोपाल को दे दी गयी। जिसकी बाद में सुरजेवाला ने घोषणा कर दी। बाबजूद इसके राहुल ने साफ़ किया कि सचिन के लिये पार्टी के दरवाज़े खुले रखने होंगे ,ऐसा कदम न उठाया जाये कि वापसी के सभी दरवाज़े बंद हो जाएं।

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